तेहरान/मस्कट: ईरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग को पुनः बंद करने की घोषणा के बाद कई जहाजों ने अपने ऊपर हमले होने की जानकारी दी है। ओमान से लगभग २५ समुद्री मील दूर एक टैंकर और एक मालवाहक जहाज पर हमला होने की पुष्टि हुई है।
टैंकर के कप्तान ने ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी को बताया कि चालक दल और जहाज दोनों सुरक्षित हैं। वहीं, मालवाहक जहाज ने अपने सामान में कुछ नुकसान होने की सूचना दी है। एक अन्य यात्री जहाज पर भी ओमान के तट के पास हमला हुआ, जहां यात्रियों ने पास में पानी के तेज छींटे महसूस किए।
इससे पहले ईरानी सेना ने कहा था कि अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों पर लगी नाकेबंदी हटाने से इनकार करने के कारण वह इस जलमार्ग पर फिर से नियंत्रण स्थापित कर रही है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को जलमार्ग खोले जाने की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में अचानक गिरावट आई थी।
अमेरिकी केंद्रीय कमान ने बताया कि सोमवार से नाकेबंदी लागू होने के बाद से अब तक २३ जहाजों को वापस लौटाया गया है। समुद्री निगरानी आंकड़ों के अनुसार, चार गैस ले जाने वाले जहाज और कई तेल टैंकर इस जलमार्ग से गुजरकर ओमान की खाड़ी की ओर बढ़े थे।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने सरकारी दूरदर्शन के माध्यम से कहा है कि युद्ध पूरी तरह समाप्त होने और क्षेत्र में शांति स्थापित होने तक होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी और नियंत्रण जारी रहेगा। परिषद ने यह भी कहा कि जहाजों का विवरण एकत्र किया जाएगा, पारगमन अनुमति दी जाएगी और सेवा शुल्क लिया जाएगा।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से जुड़े समाचार माध्यमों के अनुसार, ईरानी सेना ने जलमार्ग पर पुनः नियंत्रण स्थापित कर लिया है। सेना ने अमेरिकी नाकेबंदी को “समुद्री डकैती” बताते हुए नाराजगी जताई है।
ईरान का कहना है कि अमेरिका ने नाकेबंदी हटाने का वादा पूरा नहीं किया, इसलिए उसे जलमार्ग फिर बंद करना पड़ा। इससे पहले ईरान ने चेतावनी दी थी कि यदि उसके बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रही तो वह इस मार्ग को बंद कर देगा।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि शांति समझौता होने तक अमेरिका खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर नाकेबंदी जारी रखेगा। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना बनी हुई है।
ईरान के विदेश मंत्री ने पहले घोषणा की थी कि व्यापारिक जहाजों के लिए जलमार्ग खोला गया है, लेकिन उन्हें निर्धारित सुरक्षित मार्गों का पालन करना होगा। बाद में ईरानी सरकारी माध्यमों ने स्पष्ट किया कि केवल निर्धारित मार्गों से ही जहाजों को गुजरने की अनुमति है, जबकि सैन्य जहाजों पर अब भी प्रतिबंध रहेगा।
स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है और दोनों देशों के बीच वार्ता की संभावनाओं पर नजर रखी जा रही है।










