नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन द्वारा ईरान की मदद किए जाने के दावे पर अविश्वास जताते हुए कहा है कि अगर ऐसा किया जा रहा है, तो दोनों देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि यदि मदद की जा भी रही है, तो वह सीमित स्तर पर हो सकती है।
ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘मैं कट्टरपंथी वामपंथियों की टिप्पणियाँ देख रहा हूँ, जिनमें कहा जा रहा है कि चीन और रूस ईरान की मदद कर रहे हैं। अगर वे मदद कर भी रहे हैं, तो बहुत ही सीमित स्तर पर। लेकिन मुझे विश्वास नहीं है कि वे ऐसा कर रहे हैं। दोनों देशों को भारी नुकसान होगा।’
पिछले सप्ताह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई लगभग डेढ़ घंटे की टेलीफोन वार्ता में आर्थिक सहयोग, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
इसके बाद ट्रंप ने दावा किया था कि रूस अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल ईंधन की आपूर्ति करने और आने वाले महीनों में अतिरिक्त आपूर्ति करने पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा था कि इससे डीजल की कीमतों में कमी आएगी।
इसी तरह, पिछले सितंबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तीन दिवसीय वाशिंगटन यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई थी।
छह महीने से भी कम समय में हुई दूसरी मुलाकात के बाद अमेरिका और चीन ने दोनों दिशाओं में तीस अरब अमेरिकी डॉलर के गैर-संवेदनशील वस्तुओं के व्यापार पर अनुकूल सीमा शुल्क व्यवस्था लागू करने और उभरती प्रौद्योगिकियों पर बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
व्हाइट हाउस की तथ्यपत्रिका के अनुसार, दोनों देशों ने मई, दो हजार छब्बीस में बीजिंग में स्थापित व्यापार और निवेश संबंधी बोर्ड को भी चालू कर दिया है।
चीन ने वर्ष दो हजार सत्ताईस और दो हजार अट्ठाईस में कम से कम एक करोड़ मीट्रिक टन अमेरिकी कोयले का आयात करने पर भी सहमति जताई है।





