कोलकाता: कोलकाता के एंटाली इलाके का रहने वाला जूता कारोबारी जफर रियाज उर्फ रिजवी पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कभी अपना पारिवारिक जूता व्यवसाय चलाने वाला जफर अब कथित तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ‘इंटर-सर्भिस इंटेलिजेंस’ (आईएसआई) के लिए काम कर रहा था।
हादसे के बाद लाहोर में बना ‘आईएसआई’ कनेक्शन
सूत्रों के मुताबिक, जफर का एंटाली में जूतों का अच्छा-खासा कारोबार था और वह दो छोटे कारखाने भी चलाता था। वर्ष २०२५ में उसकी शादी लाहौर (पाकिस्तान) की रहने वाली राबिया से हुई थी। साल २०१२ तक दोनों कोलकाता में ही रहे, लेकिन एक सड़क दुर्घटना के बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। गंभीर शारीरिक और आर्थिक समस्याओं से घिरने के बाद वह पाकिस्तान चला गया।
लाहौर पहुंचने के बाद जफर की मुलाकात एक पाकिस्तानी अधिकारी से हुई, जिसने उसका संपर्क आईएसआई से कराया। इसके बाद वह इलाज कराने के बहाने लगातार भारत आता-जाता रहा और देश के रणनीतिक सैन्य ठिकानों की तस्वीरें व अहम खुफिया जानकारियां अपने पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजता रहा।
अमृतसर में पहली गिरफ्तारी और पहलगाम कनेक्शन से दोबारा खुला मामला
यह पहली बार नहीं है जब जफर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आया है। साल २०२२ में पंजाब पुलिस ने उसे बिहार के रहने वाले मोहम्मद शमसाद के साथ अमृतसर से गिरफ्तार किया था। उन पर सैन्य ठिकानों की जानकारी इकट्ठा करने का आरोप था, हालांकि बाद में उसे अदालत से जमानत मिल गई थी।
हाल ही में केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआरपीएफ) के जवान मोतीराम जाट से पूछताछ के दौरान जफर का नाम एक बार फिर सामने आया। इस ‘पहलगाम कनेक्शन’ के उजागर होने के बाद खुफिया एजेंसियों ने जफर की तलाश तेज की और करीब एक साल की लंबी निगरानी व जांच के बाद उसे कोलकाता के पास से दबोच लिया गया।
फिलहाल केंद्रीय जांच एजेंसियां इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रही हैं कि क्या जफर ने कोलकाता या पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में कोई बड़ा जासूसी नेटवर्क या स्लीपर सेल तैयार किया था। आगे की पूछताछ के लिए उसे दिल्ली ले जाया गया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच जारी है।










