गुवाहाटी: मुख्यमंत्री डा. हिमंत बिस्वा सरमा ने बीते सोमवार की रात्रि एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के उपरांत मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार ने पिछले पाँच वर्षों के भीतर २०० वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि को अतिक्रमणकारियों से वापस ले लिया है। बैठक में लिए गए दूरगामी निर्णयों के विषय में सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री डा. सरमा ने बताया, “अब हम ऐसे पुख्ता और कड़े कदम उठा रहे हैं ताकि भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले तत्व कभी भी दोबारा वापस न आ सकें।”
अधोसंरचना और कृषि विकास को दी जाएगी गति
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और विद्युत जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विभागों को ऐसे आवश्यक प्रोजेक्ट्स को चिन्हित करने के निर्देश दिए, जिन्हें केंद्र सरकार की ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ यानी व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (भीजीएफ) पहल के अंतर्गत लाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ उठाने से बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आएगी और बड़े पब्लिक प्रोजेक्ट्स की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार लाकर असम के विकास की गति को और अधिक मजबूती प्रदान की जा सकेगी।
डा. सरमा ने आगे बताया कि सरकार कृषि अवसंरचना में निवेश बढ़ाने, जीआई टैग प्राप्त एवं ऑर्गेनिक (जैविक) उत्पादों के निर्यातकों की सहायता करने तथा केंद्र से प्राप्त होने वाली हर संभव मदद का अधिकतम लाभ उठाने का प्रयास करेगी। उन्होंने ‘एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड’ (एआईएफ) के महत्व पर बल देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इस कार्यक्रम के तहत असम को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को यह भी निर्देशित किया कि वे किसानों, कृषि उत्पादकों और अन्य हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के बीच श्रेष्ठ समन्वय स्थापित करें ताकि अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजार तक राज्य के उत्पादों की पहुंच बढ़ाई जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य कृषकों की आय में वृद्धि करने के साथ-साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कृषि व्यापार के पटल पर असम की स्थिति को सुदृढ़ बनाना है।










