असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश, विपक्ष का भारी हंगामा

Screenshot_20260525_174948_Facebook

गुवाहाटी: असम कैबिनेट की मंजूरी के ठीक दो हफ्ते बाद राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, २०२६ पेश कर दिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने सदन के पटल पर इस बेहद अहम विधेयक को प्रस्तुत किया। यूसीसी बिल के सदन में पेश होते ही विपक्षी विधायकों ने इसका तीखा विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इस कानून को लाने से पहले संबंधित हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा नहीं की। सदन में विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच इस विधेयक पर २७ मई को चर्चा होने और इसे पारित किए जाने की संभावना है।
​राज्य सरकार के मुताबिक, इस विधेयक के मसौदे को असम की विशिष्ट जनसांख्यिकीय विविधता और सामाजिक ताने-बाने के अनुकूल तैयार किया गया है। यह नया कानून मुख्य रूप से नागरिक समाज से जुड़े पांच बड़े मुद्दों को नियमित करेगा। इसके तहत राज्य के भीतर बहुविवाह की प्रथा पर पूरी तरह कानूनी रोक लग जाएगी और विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र का एक तय मानक लागू होगा। इसके साथ ही, सभी शादियों और तलाकों का सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना अनिवार्य होगा। पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने तथा बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों यानी ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ के लिए कड़े नियम और पंजीकरण को अनिवार्य बनाने के प्रावधान इसमें शामिल किए गए हैं।
​महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का हक देने और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के बड़े दावों के बीच, असम सरकार ने आदिवासियों को इस कानून से पूरी तरह बाहर रखा है। आदिवासी समाज को इससे राहत देकर सरकार ने राज्य में एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है। यदि यह विधेयक विधानसभा से पास हो जाता है, तो उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम देश में यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा। इससे पहले साल २०२४ में उत्तराखंड ने देश में सबसे पहले यूसीसी लागू किया था, जबकि गुजरात विधानसभा ने भी इसी साल मार्च में इस विधेयक को पारित किया है।
​हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनाव में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने १२६ सदस्यीय विधानसभा में १०२ सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार ने अपने पहले ही सत्र में यूसीसी लाकर जनता से किया अपना सबसे बड़ा चुनावी वादा निभाया है। दूसरी तरफ कांग्रेस, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और राइजोर दल जैसे विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और कानून को लाने की टाइमिंग तथा इसके सामाजिक असर को लेकर सदन के भीतर और बाहर सियासी पारा चढ़ा हुआ है।

About Author

Advertisement