गुवाहाटी(देवेन्द्र के ढुंगाना): गुवाहाटी में मानसून शुरू होते ही बार-बार होने वाली कृत्रिम बाढ़ की समस्या फिर गंभीर हो गई है। इसके बाद गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार को बाढ़ प्रबंधन से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। शहर की बिगड़ती स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायाधीश अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता संदीप चामरिया के अनुसार अदालत ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में खुले नालों और मैनहोलों को नागरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना है। अदालत ने राज्य सरकार, गुवाहाटी नगर निगम और संबंधित विभागों को खुले नालों एवं मैनहोलों को तुरंत ढंकने तथा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने का निर्देश दिया है।
जनहित याचिका में कहा गया है कि गुवाहाटी में बार-बार आने वाली कृत्रिम बाढ़ का मुख्य कारण अव्यवस्थित शहरीकरण, कमजोर जल निकासी व्यवस्था, आर्द्रभूमियों और जलाशयों पर अतिक्रमण तथा दीर्घकालिक योजना की कमी है। हाल ही में भारी बारिश के बाद जलभराव के दौरान खुले मैनहोल में गिरकर चार लोगों की मौत ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। १९ अप्रैल को मालीगांव क्षेत्र में एक महिला की खुले नाले में गिरकर हुई मौत का मामला भी अदालत में उठाया गया।
यह घटनाक्रम असम सरकार की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। किसी भी राज्य सरकार की पहली जिम्मेदारी नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का उचित प्रबंधन करना होता है। लेकिन गुवाहाटी में वर्षों से जारी बाढ़ की समस्या सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी, कमजोर कार्यान्वयन और दीर्घकालिक योजना के अभाव को उजागर करती है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप ने अब सरकार पर केवल अस्थायी नहीं बल्कि वैज्ञानिक और स्थायी बाढ़ प्रबंधन योजना लागू करने का दबाव बढ़ा दिया है।
उच्च न्यायालय ने असम सरकार को व्यापक, वैज्ञानिक और समयबद्ध बाढ़ प्रबंधन योजना तैयार कर उसे लागू करने का निर्देश दिया है। साथ ही आगामी १२ मई की सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।








