वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए रविवार को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। हालांकि, इस संभावित समझौते के विरोध में ईरान की सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए रविवार को ही समझौते पर मुहर लग जाएगी। ईरान द्वारा हस्ताक्षर के समय को लेकर की जा रही टालमटोल के बाद ट्रंप ने खुद यह समय सीमा तय की है।
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा पाकिस्तान आगामी २४ घंटों के भीतर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आश्वस्त है और उसने “डिजिटल हस्ताक्षर” (इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर) की तैयारी भी शुरू कर दी है। दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सावधानी बरतते हुए कहा था कि हस्ताक्षर की निश्चित तिथि के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा कि समझौते के तुरंत बाद सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ जलमार्ग को सभी के लिए खोल दिया जाएगा।
ईरान में क्यों हो रहा है विरोध?
समझौते की भनक लगते ही ईरान के कट्टरपंथी संगठन “परसिस्टेंस फ्रंट” से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने तेहरान के इब्न सिना स्क्वायर और विदेश मंत्रालय के सामने भारी विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री अब्बास अराग्छी और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगर गालिबाफ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध करने वालों का मानना है कि यह समझौता ईरान के हितों के खिलाफ है और इससे ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर ईरान का दबदबा कमजोर होगा। हालांकि, विदेश मंत्री अराग्छी का कहना है कि इस समझौते से ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हट जाएगी।
ट्रंप की चेतावनी और युद्ध की पृष्ठभूमि
राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यह बातचीत सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ी, तो वाशिंगटन के पास “अंतिम विकल्प” मौजूद है। उल्लेखनीय है कि २८ फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद यह युद्ध शुरू हुआ था, जिसके जवाब में ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के मुख्य मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को बंद कर दिया था। अप्रैल में युद्धविराम के बावजूद दोनों देशों के बीच छिटपुट सैन्य टकराव जारी रहा। इस प्रस्तावित समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार को नष्ट करने का मुद्दा भी शामिल है, जिससे इजराइल को फिलहाल बाहर रखा गया है।









