‘अमेरिकन ड्रीम’ को लेकर बढ़ती उलझन के बीच भारत के कुशल कामगार ब्रिटेन की ओर आकर्षित

3fdd77c9-b269-49e5-bf04-54f01bf92505

नयी दिल्ली: ​अमेरिका में एच-१बी वीजा पर काम कर रहे भारतीय पेशेवरों और शोधकर्ताओं के बीच ग्रीन कार्ड मिलने में हो रही अत्यधिक देरी के कारण अब ब्रिटेन का ‘ग्लोबल टैलेंट वीजा’ एक नया और पसंदीदा बैकअप प्लान बनकर उभरा है।
अमेरिका के वीजा बुलेटिन के अनुसार भारतीय आवेदकों के लिए स्थायी निवास (पीआर) का प्रतीक्षा समय १४ वर्ष से भी अधिक हो चुका है। इस अनिश्चितता के बीच, खासकर ३० से ४० वर्ष के कुशल भारतीय इंजीनियर और वैज्ञानिक अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ब्रिटेन का रुख कर रहे हैं।
​इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन के ग्लोबल टैलेंट वीजा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए महज तीन साल के भीतर वहां स्थायी नागरिकता की राह आसान हो जाती है। लॉटरी प्रणाली के बजाय आवेदक की योग्यता और साक्ष्यों पर आधारित इस वीजा के लिए किसी अमेरिकी नियोक्ता की स्पॉन्सरशिप या न्यूनतम वेतन की बाध्यता नहीं होती है। इस लचीली व्यवस्था के कारण भारतीय आईटी और बिग टेक प्रोफेशनल्स अमेरिकी सपने को पूरी तरह छोड़े बिना, सुरक्षा और त्वरित पीआर की गणना के साथ ब्रिटेन को अपने करियर के नए ठिकाने के रूप में प्राथमिकता दे रहे हैं।

About Author

Advertisement