मुंबई: मुंबई के आजाद मैदान में ‘करोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) द्वारा आयोजित ‘तिरंगा फहराओ’ विरोध प्रदर्शन में उम्मीद से काफी कम लोग शामिल हुए हैं। प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति मिलने के बावजूद कार्यक्रम में 50 से भी कम लोग मौजूद रहे। शाम पांच बजे के बाद तो मैदान लगभग खाली हो गया था।
प्रदर्शन में सीजेपी के प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति, संगठन के भीतर समन्वय की कमी और कार्यक्रम के बारे में पर्याप्त सूचना न होने के विषय ने प्रतिभागियों के बीच सवाल खड़े किए हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि संभावित पुलिस कार्रवाई के डर से भी लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
मुंबई संयोजक ही प्रदर्शन स्थल पर अनुपस्थित
पुलिस से प्राप्त अनुमति के अनुसार सीजेपी की तिरंगा रैली सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलाने की योजना थी। लेकिन, शुरुआती चार घंटों तक ‘भवन सिंह जन अधिकार यात्रा’, ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन’ (एआईएसएफ) समेत संगठनों के स्वयंसेवक और सीजेपी के कुछ कार्यकर्ता ही मौजूद थे।
दोपहर करीब तीन बजे के बाद प्रदर्शनकारी आने लगे, लेकिन उनकी संख्या वहां मौजूद स्वयंसेवकों से भी कम थी। और भी उल्लेखनीय बात, सीजेपी के मुंबई संयोजक प्रणव अहिरे भी प्रदर्शन स्थल पर उपस्थित नहीं थे।
शाम पांच बजे के बाद प्रतिभागियों के लौटने के साथ ही मैदान सुनसान हो गया था।
सूचना के अभाव और नेतृत्व की अनुपस्थिति पर सवाल
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने संगठन के प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति और कार्यक्रम के बारे में पर्याप्त जानकारी न दिए जाने पर असंतोष जताया है। उनके अनुसार विरोध प्रदर्शन की घोषणा देर से की गई थी। उसमें उठाए जाने वाले मुद्दे और आगामी रणनीति के बारे में भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए संगठन को स्पष्ट योजना, जिम्मेदारी का बंटवारा और व्यवस्थित प्रचार-प्रसार करना चाहिए।
कई प्रतिभागियों ने आरोप लगाया कि सीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से भी प्रदर्शन के बारे में पर्याप्त सूचना सार्वजनिक नहीं की गई। इससे इच्छुक लोगों के लिए कार्यक्रम में शामिल होना मुश्किल हो गया।
पुलिस कार्रवाई के डर से कम लोग शामिल हुए – दावा
मुंबई निवासी आयुष नागरे ने कहा कि लोग पुलिस कार्रवाई के डर से प्रदर्शन में शामिल होने में हिचकिचा रहे होंगे। उनके अनुसार दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित कार्रवाई और व्यवहार के कारण अन्य स्थानों के लोगों में भी डर पैदा हो सकता है।
हालांकि, प्रतिभागियों की संख्या कम होने के बावजूद मौजूद लोगों ने अपना रुख कायम रखा। नागरे ने विश्वास जताया कि लोकतंत्र विभिन्न चुनौतियों के बीच भी टिका रहेगा।
रइस्सा और प्रमोदिता नाम की छात्राओं ने कहा कि वे दिल्ली में अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिए गए अपने साथियों के समर्थन में प्रदर्शन में आई हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का विरोध करते हुए एकजुटता जताई।
पांच सौ पुलिसकर्मी तैनात
विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आजाद मैदान और छत्रपति शिवाजी महाराज मेट्रो स्टेशन के आसपास पांच सौ पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ता आनंदिनी फर्नांडिस ने कहा कि सीजेपी द्वारा कार्यक्रम के बारे में आधिकारिक सूचना न देने के कारण वह अकेली आई हैं। उनके अनुसार संगठन के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी अनुमति प्राप्त प्रदर्शन के बारे में जानकारी प्रकाशित नहीं की गई थी।
उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर समन्वय की कमी के कारण लोग कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच पाए और विरोध करने वाले नागरिकों के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए भी प्रदर्शन जरूरी है।
छात्रा प्रमोदिता ने भी कहा कि संगठन के सदस्यों के बीच पर्याप्त समन्वय नहीं था। उनके अनुसार कार्यक्रम के बारे में जानकारी न पाने वाले कई प्रतिभागियों को आजाद मैदान तक पहुंचने का रास्ता भी स्पष्ट नहीं था। उन्होंने प्रदर्शन को और अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
कार्यक्रम में साम्या कोरे, आमिर काजी और सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया समेत लोगों ने संक्षिप्त संबोधन किया।
उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस ज्यादती पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही।
पुलिस के अनुसार मुंबई के आजाद मैदान में हुआ प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। पर्याप्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाने से शांति व्यवस्था से संबंधित कोई समस्या उत्पन्न नहीं हुई।
सीजेपी के नेतृत्व में वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा आयोजित उक्त विरोध कार्यक्रम शाम पांच बजे राष्ट्रगान गाकर समाप्त किया गया।
विश्लेषण: केवल अनुमति पर्याप्त नहीं, संगठनात्मक तैयारी भी जरूरी
मुंबई के आजाद मैदान में कम संख्या में प्रदर्शनकारियों के मौजूद रहने के पीछे कार्यक्रम का कमजोर प्रचार-प्रसार, नेतृत्व की अनुपस्थिति, संगठन के भीतर समन्वय की कमी और संभावित पुलिस कार्रवाई के डर जैसे कारण रहे हैं, ऐसा प्रतिभागियों ने बताया है।
यह घटना दिखाती है कि किसी भी विरोध कार्यक्रम को सफलतापूर्वक चलाने के लिए केवल प्रशासनिक अनुमति प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं होता। कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट करना, समय पर सूचना सार्वजनिक करना, जिम्मेदारी का बंटवारा करना और प्रतिभागियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
हालांकि, कम भागीदारी को केवल एक ही कारण से जोड़कर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। कार्यक्रम में शामिल न होने वाले लोगों की राय और संगठन की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध न होने तक इसके वास्तविक कारण के बारे में पूर्ण निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।
कुल मिलाकर, मुंबई के प्रदर्शन ने राजनीतिक और नागरिक अभियानों में संगठनात्मक तैयारी, प्रभावी संचार और प्रतिभागियों की सुरक्षा से संबंधित विश्वास के महत्व को उजागर किया है।_





