अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का पराक्रम

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समुद्री लुटेरों का हमला नाकाम, सुरक्षित बचाए गए क्रू मेंबर्स

नई दिल्ली: अदन की खाड़ी में भारत के लिए बेहद जरूरी सामान लेकर आ रहे एक मालवाहक जहाज पर समुद्री लुटेरों (पाइरेट्स) द्वारा कब्जे के प्रयास को भारतीय नौसेना ने पूरी तरह नाकाम कर दिया है। नौसेना के युद्धपोत ‘आईएनएस त्रिशूल’ की मुस्तैदी और समय पर की गई कार्रवाई की वजह से जहाज और उस पर सवार सभी क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं।
​बुधवार रात समुद्री डाकुओं ने मालवाहक जहाज ‘एमवी गोल्डन आर्सेनल’ को अपना निशाना बनाने की कोशिश की थी। इस जहाज पर एक भारतीय क्रू मेंबर भी मौजूद था। डाकुओं का हमला होते ही क्रू मेंबर्स ने सूझबूझ दिखाई और खुद को एक सुरक्षित कमरे (सिटाडेल) में बंद कर लिया। इसके बाद उन्होंने कम्युनिकेशन चैनल के जरिए भारतीय नौसेना को डकैती की इस कोशिश की जानकारी दी।
​मार्कोस कमांडो ने संभाला मोर्चा:
​जैसे ही भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल तेजी से उस जहाज की तरफ बढ़ा, नौसेना के खौफ से समुद्री लुटेरे जहाज छोड़कर भाग खड़े हुए। इसके बाद भारतीय नौसेना के घातक मरीन कमांडो मार्कोस जहाज पर उतरे। कमान्डो दस्ते ने पूरे जहाज की सघन तलाशी ली और उसे पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया।
​दो महीने पहले भी नाकाम किया था हमला:
​भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में पहली बार ऐसा पराक्रम नहीं दिखाया है। इससे पहले दो महीने पहले २६ मई २०२६ को भी पश्चिमी हिंद महासागर में मालवाहक जहाज ‘एमवी माशाअल्लाह-1’ पर समुद्री डाकुओं के हमले के खतरे को नौसेना के युद्धपोत ‘आईएनएस कोलकाता’ ने समय पर कार्रवाई करते हुए टाल दिया था।
​साल २००८ से अदन की खाड़ी में लगातार तैनाती:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने और लुटेरों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना साल २००८ से अदन की खाड़ी और उसके आसपास के समुद्री इलाके में मिशन पर मुस्तैद है। हालिया दिनों में क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए नौसेना ने अपनी गश्ती और चौकसी को और अधिक कड़ा कर दिया है।

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