अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के कारणों का बेन स्टोक्स ने किया खुलासा

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लण्डन: ​इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के अपने फैसले के पीछे के मुख्य कारणों का खुलासा किया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी तीसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन अचानक संन्यास की घोषणा करने वाले स्टोक्स के अनुसार, यह फैसला किसी एक घटना की वजह से नहीं बल्कि लंबे समय से जारी मानसिक और शारीरिक थकान का परिणाम है। स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत के दौरान स्टोक्स ने कहा कि भले ही अभी उनका यह फैसला कई लोगों को स्वार्थी लग सकता है, लेकिन उनके लिए यह सबसे सही समय है और उन्हें पूरा भरोसा है कि यह टीम के लिए भी अच्छा साबित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले के बाद वे उस खेल से प्यार करना जारी रख सकेंगे, जिसने उन्हें जीवन में इतना सब कुछ दिया है। स्टोक्स का अंतरराष्ट्रीय करियर सोमवार को समाप्त हो गया, जहां उन्होंने अपने १५ साल के सफर में इंग्लैंड के लिए ११२ टेस्ट, ११४ वनडे और ४३ टी२० अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। स्टोक्स ने यह भी साफ किया कि इंग्लैंड क्रिकेट द्वारा हाल ही में हुई एक घटना के बाद की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई उनके इस फैसले की वजह नहीं है। दरअसल, न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में जीत के बाद लंदन के एक नाइट क्लब में हुई घटना के कारण स्टोक्स को दूसरे टेस्ट की टीम से बाहर कर दिया गया था। स्टोक्स ने बताया कि संन्यास का विचार उनके मन में बहुत पहले ही आ चुका था। उन्होंने कहा कि लॉर्ड्स टेस्ट ने उन्हें फिर से वैसा ही नकारात्मक अनुभव कराया, जैसा उन्होंने एशेज सीरीज के दौरान महसूस किया था। ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद उन्होंने खुद में सुधार लाने के लिए बहुत मेहनत की और उन्हें लगा कि वे सही दिशा में जा रहे हैं, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह थका दिया।
​स्टोक्स के अनुसार, पिछले कुछ हफ़्तों के घटनाक्रम ने केवल उनके इस फैसले को और मजबूत करने का काम किया। इंग्लैंड के कप्तान ने बताया कि लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान ड्रेसिंग रूम में जो रूट के साथ हुई बातचीत के बाद उन्हें अहसास हुआ कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि पिछले कुछ महीनों से उनके मन में चल रहा था। पिछले दो हफ्ते काफी कठिन रहे और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं ने उनके विचारों को और पक्का कर दिया। गौरतलब है कि दूसरे टेस्ट मैच की टीम से बाहर होने के बाद स्टोक्स ने अपने काउंटी क्लब डरहम के लिए खेला था। उन्होंने कहा कि जब वे दूसरे टेस्ट से बाहर होकर डरहम के लिए खेल रहे थे, तब उन्हें लगा कि क्रिकेट के प्रति उनका उत्साह फिर से लौट आया है, लेकिन इंग्लैंड की टीम में वापस लौटने के बाद वे उस अनुभव को महसूस नहीं कर सके। इसी वजह से वे अब अपने बचपन के क्लब डरहम से खेलने के लिए उत्साहित हैं और उन्हें अपना यह फैसला बिल्कुल सही लगता है। इस तरह स्टोक्स ने साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदा लेने के बाद भी वे घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। ३५ वर्षीय स्टोक्स ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ साल उनके लिए बेहद कठिन रहे हैं, जहां घुटने, हैमस्ट्रिंग, कंधे और एडक्टर की चोटों ने उनके शरीर पर लगातार बुरा असर डाला। इससे पहले २०२१ में भी उन्होंने अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए क्रिकेट से ब्रेक लिया था। उन्होंने कहा कि सिर्फ पिछले ४-५ हफ्ते ही नहीं बल्कि पिछले ६ महीने मुश्किलों से भरे रहे हैं, इसलिए संन्यास के दिन मन में राहत, खुशी, उत्साह और दुख जैसी भावनाएं एक साथ आ रही हैं। इंग्लैंड की कप्तानी करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा, लेकिन इस जिम्मेदारी का एक दूसरा पहलू भी है जिसे केवल उनके करीबी लोग ही देख पाते हैं। उनकी पत्नी और परिवार को ही पता है कि यह जिम्मेदारी किसी को कितना थका देती है और मानसिक रूप से कितना प्रभावित करती है। स्टोक्स ने अंत में कहा कि हमारा खेल शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कठिन है, लेकिन वे अपने करियर से पूरी तरह संतुष्ट हैं क्योंकि उन्होंने एशेज जीती, ५० ओवर का वर्ल्ड कप जीता, टी२० वर्ल्ड कप भी जीता और उन्हें इंग्लैंड की कप्तानी करने के साथ-साथ दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिला, इसलिए उन्हें अपने करियर से कोई शिकायत नहीं है।

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