नई दिल्ली: भारत और अफगानिस्तान के बीच ३ टी-२० मैचों की सीरीज १३ से १७ सितंबर तक दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेली जाएगी। बीसीसीआई ने इसके लिए मंगलवार को १५ सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा भी कर दी। श्रेयस अय्यर टीम के कप्तान और तिलक वर्मा उपकप्तान होंगे। इस टीम में ४ ऐसे खिलाड़ी भी चुने गए हैं, जिनकी उपलब्धता फिटनेस क्लियरेंस पर निर्भर है। इनमें स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी, ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर और तेज गेंदबाज हर्षित राणा शामिल हैं।
बीसीसीआई ने आधिकारिक टीम सूची में इन ४ खिलाड़ियों के नामों के साथ ‘फिटनेस क्लियरेंस के अधीन’ लिखा है। चयन समिति के इसी फैसले को लेकर अब विवाद शुरू हो गया है। किसी खिलाड़ी को टीम में चुनना और फिर उनके फिटनेस क्लियरेंस का इंतजार करना वैसे तो गलत नहीं लगता, खासकर तब जब वे खिलाड़ी टीम के महत्वपूर्ण सदस्य हों। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या इन खिलाड़ियों को शुरुआती टीम में शामिल करना वाकई जरूरी था? इन चारों ही खिलाड़ियों को अतीत में भी फिटनेस से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ा है। इसी कारण टीम में वापसी से पहले उन्हें मैच फिटनेस हासिल करने के लिए पर्याप्त समय देना एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता था। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में फिट होना और मैच के लिए पूरी तरह तैयार होना दो अलग-अलग बातें हैं। भले ही कोई फिटनेस टेस्ट पास कर ले, लेकिन उस खिलाड़ी को सीधे टी-२० क्रिकेट में खिलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से चयनकर्ताओं के पास मौजूद अन्य विकल्पों का भी इस्तेमाल किया जा सकता था।
भारत के पास टी-२० प्रारूप के लिए विकल्पों की कोई कमी नहीं है। तेज गेंदबाज बुमराह के स्थान पर भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद सिराज या मयंक यादव जैसे खिलाड़ियों के नामों पर विचार किया जा सकता था। इसी तरह वाशिंगटन सुंदर के स्थान पर क्रुणाल पांड्या को खिलाने का विकल्प मौजूद था, जो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। नीतीश कुमार रेड्डी के स्थान पर सिराज या मयंक जैसे खिलाड़ी टीम के गेंदबाजी संयोजन को मजबूती दे सकते थे। वहीं हर्षित राणा के स्थान पर प्रिंस यादव जैसे युवा तेज गेंदबाज को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का अनुभव हासिल करने का मौका दिया जा सकता था। इसके अलावा बीसीसीआई ने खुद टीम में युवा प्रतिभाओं को जगह देने का फैसला किया है और वैभव सूर्यवंशी इसका एक उदाहरण हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले अन्य खिलाड़ियों को मौका देने का विकल्प उपलब्ध था।
इस चयन को केवल ३ मैचों की सीरीज के नजरिए से देखना भी गलत होगा। यही १५ सदस्यीय टीम जापान में होने वाले एशियाई खेलों में हिस्सा लेगी। इसी वजह से चयनकर्ता संभवतः अपने प्रमुख खिलाड़ियों को आगामी बड़े आयोजनों के संयोजन की तैयारी के लिए एक ही समूह में रखना चाहते हैं। बुमराह जैसे खिलाड़ी की मौजूदगी टीम के लिए फायदेमंद साबित होगी, लेकिन उनकी फिटनेस को लेकर जोखिम भी उतना ही बड़ा है। अब असली परीक्षा यह होगी कि फिटनेस क्लियरेंस मिलने के बाद क्या खिलाड़ियों को तुरंत मैच में खिलाया जाएगा या टीम प्रबंधन उन्हें धीरे-धीरे (चरणबद्ध तरीके से) मैदान पर उतारने का फैसला लेगा।
टीम का चयन करते समय बीसीसीआई ने फिटनेस को ध्यान में नहीं रखा—यह दावा अभी से करना भी सही नहीं होगा, क्योंकि चारों खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बोर्ड ने शर्त पहले ही स्पष्ट कर दी है। हालांकि, विकल्प मौजूद होने के बावजूद चयन समिति के फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब बीसीसीआई की नजर ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की फिटनेस रिपोर्ट पर टिकी होगी। यदि ये चारों खिलाड़ी सीरीज से पहले फिट घोषित हो जाते हैं, तो सभी मैच खेल सकेंगे और ऐसे में चयन समिति का फैसला सही साबित होगा। लेकिन इस दौरान यदि इन खिलाड़ियों के साथ फिटनेस संबंधी समस्याएं खड़ी होती हैं, तो यह सवाल जरूर उठेगा कि विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद जल्दबाजी में टीम चुनने की क्या जरूरत थी।





