नई दिल्ली: भारतीय भारोत्तोलक (वेटलिफ्टर) और ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू जापान के आइची-नागोया में होने वाले आगामी एशियाई खेलों में ओलंपिक जैसी कठिन चुनौती के लिए तैयार हैं, जहां उन्हें चीन, उत्तर कोरिया और थाईलैंड की शीर्ष खिलाड़ियों से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। भारत की इस ३२ वर्षीय खिलाड़ी ने विश्व स्तर पर लगभग हर पदक जीता है, जिसमें २०२० टोक्यो ओलंपिक में जीता गया रजत पदक भी शामिल है, लेकिन वे एशियाई खेलों में अब तक कोई पदक नहीं जीत पाई हैं। मीराबाई ने हाल ही में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता था।
मीराबाई ने १९ सितंबर से शुरू होने वाले एशियाई खेलों से पहले साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) केंद्र से कहा, “राष्ट्रमंडल खेलों में मेरे लिए प्रतिस्पर्धा बहुत कठिन नहीं थी। ग्लासगो में मुझे बहुत अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ी, लेकिन असली परीक्षा अब होगी। मैं देखना चाहती हूं कि जापान में मैं कितना आगे तक जा सकती हूं। एशियाई खेल मेरे लिए हमेशा से सबसे कठिन रहे हैं। इस बार एशियाई खेलों में शायद ओलंपिक जैसी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी, क्योंकि मेरे भार वर्ग में सबसे मजबूत भारोत्तोलक एशिया से ही हैं।”
एशियाई खेलों में मीराबाई का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन २०२३ में हांगझोउ में रहा था, जहां वे ४९ किग्रा वर्ग में चौथे स्थान पर रही थीं। वहीं, चोट के कारण वे २०१८ के जकार्ता एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले पाई थीं। मीराबाई को अच्छी तरह पता है कि एशियाई खेलों में पहला पदक जीतने के लिए उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। यही वजह है कि वे कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं।
मीराबाई इस समय मुख्य कोच विजय शर्मा और अमेरिका के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच डॉ. आरोन हार्शिंग के मार्गदर्शन में कड़ी मेहनत कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि एशियाई खेलों की गंभीरता को देखते हुए ही मीराबाई ने राष्ट्रमंडल खेलों के बाद घर लौटकर आराम करने के बजाय सीधे मोदीनगर स्थित अपने अभ्यास केंद्र जाने का फैसला किया।









