इस्लामाबाद: पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख असीम मुनीर और शहबाज शरीफ सरकार पर देश में शांति स्थापित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। पेशावर में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने पाकिस्तानी सेना के इतिहास, देश की आंतरिक सुरक्षा और बलूचिस्तान के मौजूदा हालात पर तीखे सवाल खड़े किए।
मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि पाकिस्तानी सेना का झूठ बोलने का पुराना इतिहास रहा है। १९७१ के युद्ध में भारत के समक्ष आत्मसमर्पण करने से एक दिन पहले जनरल याह्या खान ने आखिरी सांस तक लड़ने की बात कही थी, लेकिन अगले ही दिन हथियार डाल दिए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में उन्हें सैन्य मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है, तो सेना को भी राजनीति से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ते तनाव तथा खून-खराबे पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जब देश की जनता तकलीफ में है, तब सत्ता और सेना जश्न में डूबी है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विदेश दौरों पर तंज कसते हुए कहा कि देश की जमीन खून से सनी है और वे दुनिया भर में रेड कार्पेट का आनंद ले रहे हैं।










