बिना मुकदमे १२ महीने तक हिरासत का प्रावधान
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए सोमवार से नया गुंडा नियंत्रण कानून लागू हो गया है। इस कड़े कानून के तहत संगठित हिंसा, दंगा और तोड़फोड़ में शामिल संदिग्धों को बिना मुकदमा चलाए अधिकतम १२ महीने तक एहतियाती हिरासत (प्रिवेंटिव डिटेंशन) में रखा जा सकेगा।
हाल ही में विधानसभा के विशेष सत्र में पारित ‘पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, २०२६’ को राज्यपाल आर.एन. रवि की मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे राज्य भर में प्रभावी करने की घोषणा की।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तर प्रदेश और गुजरात के मॉडल पर तैयार इस कानून में अपराधियों के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठाने के प्रावधान हैं। अब सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से न सिर्फ हर्जाना वसूला जाएगा, बल्कि उनकी चल-अचल संपत्तियों को भी कुर्क व जब्त किया जा सकेगा। इस कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, जिससे पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार मिलेगा और आरोपियों की जमानत मुश्किल होगी।
प्राचीन रथयात्रा समितियों को वित्तीय मदद देगी सरकार
इसी के साथ, बंगाली संस्कृति और धरोहरों को सहेजने के लिए राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। आर्थिक तंगी से जूझ रही १०० से १५० वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रथयात्रा समितियों को सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करने जा रही है। सोमवार दोपहर राज्य सचिवालय ‘नवान्न’ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद इन चयनित समितियों को आर्थिक सहायता राशि सौंपेंगे।











