आखिरी समय के गोल ने बदली कनाडा की किस्मत, दक्षिण अफ्रीका का अभियान समाप्त

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​लॉस एंजिल्स: फीफा वर्ल्ड कप २०२६ के राउंड ऑफ ३२ के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में सह-मेजबान कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को १-० से हराकर इतिहास रच दिया है। रविवार देर रात लॉस एंजिल्स स्टेडियम में खेले गए इस मैच के इंजुरी टाइम (९२वें मिनट) में कप्तान स्टीफन यूस्टाकियो ने एक शानदार गोल दागकर अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इस खिताबी जीत के साथ ही कनाडा ने पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है, जबकि इससे पहले १९८६ और २०२२ के वर्ल्ड कप में टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब अगले दौर में कनाडा का सामना नीदरलैंड और मोरक्को के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा। मैच की शुरुआत से ही दक्षिण अफ्रीका ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया और कई अच्छे मौके बनाए, लेकिन सटीक फिनिशिंग की कमी के कारण वे बढ़त नहीं बना सके। वहीं कनाडा ने भी पलटवार करते हुए कई बेहतरीन मौके तैयार किए। पहले हाफ के अंत में कनाडा दो बार गोल करने के बेहद करीब पहुंचा, लेकिन पहले दक्षिण अफ्रीका के डिफेंडर आब्रे माडिबा ने मोइज बम्बिटो के हेडर को गोललाइन से क्लियर कर दिया और फिर तुरंत बाद गोलकीपर रोनवेन विलियम्स ने ताजोन बुकानन के शॉट का असाधारण बचाव किया, जिससे हाफ-टाइम तक मुकाबला गोलरहित रहा।
​हाफ-टाइम के ब्रेक के बाद कनाडा ने मैच पर अपना नियंत्रण मजबूत किया और दक्षिण अफ्रीकी पोस्ट पर लगातार हमले जारी रखे। इस दौरान तानी ओलुवासेयी के एक शक्तिशाली शॉट को रोनवेन विलियम्स ने मुस्तैदी से रोका और फिर डिफेंडर म्बेकेजेली म्बोकाजी ने समय रहते गेंद को क्लियर करके रिबाउंड पर गोल होने से बचा लिया। मैच के ७५वें मिनट में कनाडा ने अपने स्टार खिलाड़ी अल्फोंसो डेविस को मैदान पर उतारा, जिनकी रफ्तार और बेहतरीन ड्रिब्लिंग ने दक्षिण अफ्रीकी डिफेंस को भारी दबाव में ला दिया। जब निर्धारित ९० मिनट का खेल बिना किसी गोल के समाप्त हुआ, तो ऐसा लग रहा था कि मैच अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में जाएगा, लेकिन इंजुरी टाइम के दूसरे मिनट में कप्तान स्टीफन यूस्टाकियो ने बॉक्स के बाहर से एक शानदार फर्स्ट-टाइम शॉट लगाकर गेंद को सीधे नेट में डाल दिया, जिसे रोकने में गोलकीपर विलियम्स पूरी तरह नाकाम रहे। यह जीत कनाडा के पुरुष फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है, क्योंकि टीम ने न केवल पहली बार नॉकआउट चरण में जगह बनाई बल्कि पहला नॉकआउट मैच जीतकर प्री-क्वार्टर फाइनल में भी प्रवेश किया। दूसरी ओर, इस हार के बावजूद दक्षिण अफ्रीका की टीम सिर ऊंचा करके टूर्नामेंट से विदा हुई, क्योंकि वे भी अपने इतिहास में पहली बार वर्ल्ड कप के नॉकआउट राउंड तक पहुंचने में सफल रहे थे।

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