काठमांडू: अगले सप्ताह चितवन के भरतपुर में अपना पहला ऐतिहासिक महाधिवेशन आयोजित करने जा रही नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी ‘राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी’ (रास्वपा) में आंतरिक गुटबाजी तेज हो गई है। हाल ही में संपन्न हुए जिला और प्रांतीय अधिवेशनों में पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने और वरिष्ठ नेता व प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ‘बालेन’ के समर्थकों के बीच सीधे तौर पर पैनल बनाकर चुनाव लड़ने के आरोप सामने आए हैं।
कोशी प्रांत में गुटबाजी के आरोप से हड़कंप
कोशी प्रांत की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार रहीं गोमा (सरिन) तामाङ ने आरोप लगाया है कि वे पार्टी के भीतर जारी इसी गुटबाजी का शिकार हुई हैं। उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि चुनाव के दौरान जमीनी स्तर पर दो स्पष्ट गुट सक्रिय थे—एक गुट खुद को पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने का करीबी बता रहा था, तो दूसरा गुट प्रधानमंत्री बालेन शाह के नाम पर वोट मांग रहा था। कोशी प्रांत में चंद्र बहादुर राई चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन तामाङ अब इस गुटबाजी के खिलाफ केंद्रीय चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं। दूसरी ओर, पार्टी के चुनाव आयोग प्रमुख भुवन केसी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शीर्ष नेताओं के नाम पर गुटबाजी रोकने के लिए सख्त आचार संहिता लागू की गई है।
पावर बैलेंस और बालेन गुट का प्रभाव
नेपाल में पिछले साल अगस्त-सितंबर (भदौ) में हुए ‘जेन जी’ आंदोलन और उसके बाद फरवरी-मार्च (फागुन) के संसदीय चुनावों में रास्वपा ने करीब दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था। इस चुनाव से ठीक पहले काठमांडू महानगर के मेयर बालेन शाह प्रधानमंत्री पद की शर्त पर रास्वपा में शामिल हुए थे। फिलहाल देश के ६४ जिलों में पार्टी का अधिवेशन संपन्न हो चुका है, जिनमें से अधिकांश सीटों पर रवि लामिछाने गुट के नेताओं ने जीत दर्ज की है। हालांकि, बालेन गुट के प्रमुख नेता और उनके पूर्व निजी सचिव भूपदेव शाह वर्तमान में पार्टी के महासचिव हैं। बालेन गुट और विवेकशील साझा पार्टी से आए नेताओं को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए रास्वपा ने दो चरणों वाली चुनाव प्रणाली तैयार की है।
मधेश प्रांत में विवाद: अधिवेशन स्थगित
मधेश प्रांत के ८ में से ७ जिलों और पूरे प्रांतीय संगठन का अधिवेशन महाधिवेशन के बाद तक के लिए टाल दिया गया है। जानकारों के अनुसार, मधेश के आम मतदाताओं के बीच बालेन शाह का क्रेज तो बहुत है, लेकिन पार्टी संगठन पर उनकी पकड़ कमजोर है। इसके अलावा हाल ही में पार्टी में शामिल हुए अमरेश कुमार सिंह का प्रभाव भी इस क्षेत्र में देखा जा रहा है। अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए नेताओं के बीच पदों के बंटवारे को लेकर मचे घमासान के कारण मधेश में चुनाव प्रक्रिया बाधित हुई, जिसे पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल स्थगित करना ही बेहतर समझा।
ईवीएम और मोबाइल ऐप से ‘ग्लोबल’ वोटिंग
चितवन में रविवार से शुरू हो रहे इस महाधिवेशन को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने के लिए रास्वपा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल करेगी। इसके साथ ही, विदेशों में रह रहे पार्टी के प्रवासी संगठनों के लगभग १७० से २०० प्रतिनिधि ‘रास्वपा मोबाइल ऐप’ के जरिए विदेश से ही डिजिटल वोटिंग कर सकेंगे, जो नेपाली राजनीति में एक नया प्रयोग है।










