ब्रसेल्स: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर दिए गए विवादित बयान के तुरंत बाद यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक और भारत विरोधी कदम उठाया है। यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर प्रतिबंधों का २१वां पैकेज प्रस्तावित किया है, जिसमें रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र का समर्थन करने के आरोप में भारत और चीन सहित कई देशों के वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा नेटवर्क, सैन्य आपूर्ति शृंखलाओं और लगभग ५० कंपनियों को निशाना बनाया गया है। इसी साल दोनों के बीच व्यापार समझौता होने के बावजूद भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का यह प्रस्ताव काफी हैरान करने वाला है।
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी घोषणा करते हुए कहा कि इस नए पैकेज का मकसद रूस की युद्ध-अर्थव्यवस्था की नींव को ईंट-दर-ईंट ढहाना है ताकि वह यूक्रेन में अपने सैन्य अभियानों के लिए फंड न जुटा सके। इस प्रस्तावित पैकेज में रूसी तेल की कीमत पर लगे प्राइस कैप को अस्थायी रूप से रोकना, मौजूदा प्रतिबंधों से बचने वाले संस्थानों पर लगाम कसना और बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों और क्रिप्टोकरेंसी ऑपरेटरों को निशाना बनाने वाले अतिरिक्त उपाय शामिल हैं। इन ५० कंपनियों की सूची में भारत, चीन, तुर्की, यूएई, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान की फर्में शामिल हैं, हालांकि इनमें कितनी भारतीय कंपनियां हैं इसकी सटीक जानकारी नहीं दी गई है। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए ईयू के सभी सदस्य देशों की मंजूरी मिलना बाकी है। इससे पहले अक्टूबर २०२५ में जारी ईयू के १९वें प्रतिबंध पैकेज में भी ३ भारतीय कंपनियों पर सीधे प्रतिबंध लगाए गए थे।










