नई दिल्ली: उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अमेरिका के सामने अपने सख्त रुख को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की बहन और वरिष्ठ नेता किम यो जोंग ने साफ तौर पर कहा है कि उनका देश किसी भी कीमत पर अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम बंद नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिका की परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को पूरी तरह “पुरानी और अव्यावहारिक सोच” करार देते हुए खारिज कर दिया। किम यो जोंग ने दावा किया कि उत्तर कोरिया अब एक स्थापित परमाणु शक्ति है और इस सच्चाई को बदलने की कोई भी कोशिश न तो व्यावहारिक है और न ही कानूनी रूप से संभव है। उन्होंने अमेरिका के उस दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि वैश्विक स्तर पर उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर कोई आम सहमति बन रही है। उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया पर लगातार सैन्य दबाव बनाने का सीधा आरोप लगाया है। किम यो जोंग के अनुसार, क्षेत्र में लगातार बढ़ते सैन्य अभ्यास और घातक हथियारों की तैनाती के कारण ही उनका देश अपनी परमाणु क्षमता को और अधिक मजबूत करने के लिए मजबूर हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साल २०१९ में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता विफल होने के बाद से ही प्योंगयांग ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को काफी तेज कर दिया था। हाल ही में किम जोंग उन ने खुद एक परमाणु सामग्री उत्पादन संयंत्र का दौरा कर हथियार क्षमता को तेजी से बढ़ाने के निर्देश दिए थे। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग उत्तर कोरिया के महत्वपूर्ण दौरे की तैयारी में हैं, जहां माना जा रहा है कि चीन आर्थिक सहयोग बढ़ाकर इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को और मजबूत करना चाहता है। दूसरी ओर, रूस के साथ भी उत्तर कोरिया के संबंध बहुत तेजी से गहरे हो रहे हैं, जिससे रणनीतिक शक्ति संतुलन बदलता हुआ दिख रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर कोरिया अब खुद को स्थायी परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक मान्यता हासिल करना और आर्थिक प्रतिबंधों में ढील पाना चाहता है। उत्तर कोरिया के इस कड़े रुख के बाद कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती साबित हो रहा है।










