सिआइडी के सामने पेश नहीं होंगे अभिषेक बनर्जी, साइन विवाद जांच में भेजा जवाब

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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी सोमवार को सिआइडी के समक्ष पेश नहीं होंगे। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने जांच एजेंसी को पत्र भेजकर पेशी में शामिल न हो पाने का कारण बताया है। हस्ताक्षर विवाद (साइन रो) मामले की जांच के सिलसिले में सिआइडी ने उन्हें सोमवार दोपहर १२ बजे भवानी भवन स्थित मुख्यालय में तलब किया था।
तृणमूल सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी फिलहाल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनके दाहिने जबड़े, गर्दन और सीने के आसपास अब भी दर्द बना हुआ है। चिकित्सकों की सलाह पर वह फिलहाल घर पर आराम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि शनिवार को चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित लोगों से मिलने के दौरान अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ था। घटना के बाद उन्हें कोलकाता के एक निजी अस्पताल ले जाया गया था। बाद में दूसरे अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं बताई और घर पर आराम करने की सलाह दी।

क्या है साइन विवाद?
यह पूरा मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन से जुड़ा हुआ है। ४ मई को चुनाव परिणाम आने के बाद 6 मई को ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर विजयी विधायकों की बैठक बुलाई थी। उस बैठक में विधायकों ने हाथ उठाकर पार्टी नेतृत्व को संसदीय दल के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक चुनने का अधिकार दिया था।
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्र को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने की जानकारी विधानसभा को भेजी। इस संबंध में अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी विधानसभा को सौंपा गया था।
हालांकि विधानसभा ने इस पत्र को स्वीकार नहीं किया। नियमों के अनुसार संसदीय दल के नेता और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव संसदीय दल की बैठक में ही होना चाहिए। इसके बाद 19 मई को दोबारा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विधायकों से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए।
विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ विधायकों ने दावा किया कि उनसे १९ मई को हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन दस्तावेजों में तारीख 6 मई दर्ज थी। इसी कथित विसंगति को लेकर जांच शुरू हुई और मामला CID तक पहुंचा।
अब अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी के बाद जांच एजेंसी उनके अगले कदम और संभावित नई पेशी तिथि पर फैसला कर सकती है। इस मामले पर राज्य की राजनीति में भी लगातार हलचल बनी हुई है।

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