यरुशलम: गाजा की ओर मानवीय सहायता सामग्री ले जा रहे नौकाओं के काफिले (फ्लोटिला) में सवार फलस्तीन समर्थक कार्यकर्ताओं के साथ इजरायली नौसेना और दक्षिणपन्थी मन्त्री द्वारा किए गए बर्ताव की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी आलोचना हो रही है।
इजरायल के कट्टर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो ने इस विवाद को हवा दी है। वीडियो में हिरासत में लिए गए विदेशी और स्थानीय कार्यकर्ताओं को हथकड़ी लगाए और घुटनों के बल बैठे दिखाया गया है, जबकि मंत्री बेन-ग्वीर उनका मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर कड़ा राजनयिक विरोध
अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और कनाडा सहित कई देशों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने इसे मानवीय गरिमा का उल्लंघन और पूरी तरह से ‘अस्वीकार्य’ बताया है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने दृश्यों को ‘शर्मनाक’ करार देते हुए लंदन में इजरायली दूतावास को तत्काल स्पष्टीकरण के लिए तलब किया है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भी इस कृत्य की निंदा की है। इटली, फ्रांस, नीदरलैंड्स, बेल्जियम और स्पेन ने इजरायली राजदूतों को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
नेतन्याहू और विदेश मंत्री भी हुए नाराज
अन्तरराष्ट्रीय दबाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी अपने कैबिनेट सहयोगी की इस हरकत से पल्ला झाड़ लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘इजरायल को उकसावे वाली नौकाओं को गाजा पहुंचने से रोकने का पूरा अधिकार है, लेकिन मंत्री बेन-ग्वीर का व्यवहार इजरायल के मूल्यों और मानकों के अनुरूप नहीं है।’ नेतन्याहू ने अधिकारियों को हिरासत में लिए गए लोगों को जल्द से जल्द देश से बाहर भेजने का निर्देश दिया है।
इससे पहले इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी बेन-ग्वीर की आलोचना करते हुए कहा था कि इस शर्मनाक हरकत के जरिए जानबूझकर देश की छवि को नुकसान पहुंचाया गया है।
क्या है फ्लोटिला विवाद?
‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ लगभग ५० नौकाओं का एक अंतरराष्ट्रीय नागरिक अभियान है, जो गाजा के विस्थापितों के लिए खाद्य सामग्री और चिकित्सा आपूर्ति लेकर तुर्की से रवाना हुआ था। इजरायली नौसैनिक कमांडो ने सोमवार को साइप्रस के पश्चिम में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस बेड़े को रोका और कार्यकर्ताओं को अशदोद बंदरगाह पर हिरासत में ले लिया। मानवाधिकार संगठनों ने इस हिरासत को अवैध बताते हुए कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है।











