खाँदबारी–किमाथाङ्का सड़क: नेपाल–चीन–भारत को जोड़ने वाले त्रिदेशीय रणनीतिक मार्ग की नई आधारशिला

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देवेन्द्र किशोर

खाँदबारी से किमाथाङ्का तक के सड़क खंड में नेपाली सेना द्वारा ‘ट्रैक ओपन’ और सड़क स्तरोन्नयन का कार्य पूरा किए जाने के साथ ही नेपाल–चीन–भारत को जोड़ने वाले संभावित त्रिदेशीय व्यापारिक कॉरिडोर पर चर्चा फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय गौरव परियोजना के अंतर्गत आने वाली खाँदबारी–किमाथाङ्का सड़क केवल दुर्गम हिमाली क्षेत्र को जोड़ने वाली आधारभूत संरचना नहीं, बल्कि नेपाल के पूर्वी भूभाग को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और रणनीतिक पहुँच से जोड़ने वाली दीर्घकालीन परियोजना के रूप में देखी जा रही है।
१६२ किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना में नेपाली सेना ने १०.८ किलोमीटर क्षेत्र में ट्रैक खोलने तथा आवश्यक स्थानों पर सड़क स्तरोन्नयन का कार्य पूरा किया है। अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थिति, कठोर चट्टानों और जोखिमपूर्ण इलाके के कारण निर्माण सामग्री हेलिकॉप्टर के माध्यम से पहुँचाई गई। चट्टानों को विस्फोटक पदार्थ से तोड़ने की आवश्यकता पड़ने पर नेपाल सरकार की मंत्रिपरिषद ने सितंबर २०२० में सेना को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी थी।
जनवरी २०२४ में इस सड़क का ‘ब्रेक थ्रू’ पूरा हो चुका है, जिससे उत्तर–दक्षिण कोशी राजमार्ग अब व्यावहारिक संचालन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष सेना ने दो किलोमीटर से अधिक नया ट्रैक खोला तथा चार किलोमीटर से अधिक सड़क का स्तरोन्नयन किया है। निर्माण पूरा होने के बाद इस खंड को उत्तर–दक्षिण कोशी सड़क आयोजना को हस्तांतरित करने की तैयारी की जा रही है।
इस सड़क का महत्व केवल सङ्खुवासभा के दुर्गम इलाकों को जोड़ने तक सीमित नहीं है। किमाथाङ्का नाका के माध्यम से चीन के तिब्बत क्षेत्र और दक्षिण में जोगबनी सीमा तक जुड़ने वाला यह मार्ग नेपाल के लिए संभावित त्रिदेशीय आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित हो सकता है। भौगोलिक दृष्टि से चीन और भारत के बीच सबसे कम दूरी वाला मार्ग माने जाने वाले किमाथाङ्का–जोगबनी खंड के संचालन में आने से पूर्वी नेपाल की व्यापारिक गतिविधियों में व्यापक परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है।
विशेष रूप से धनकुटा, तेह्रथुम, भोजपुर, सुनसरी, मोरङ और झापा के नागरिकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि उत्पादन, जड़ी-बूटी व्यापार, पर्यटन तथा सीमापार व्यापार विस्तार के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
हालाँकि, सड़क निर्माण पूरा हो जाने मात्र से अपेक्षित उपलब्धियाँ स्वतः सुनिश्चित नहीं हो जातीं। सड़क संचालन के साथ सीमा क्षेत्र में कस्टम, सुरक्षा, संचार, बिजली तथा आपातकालीन सेवाओं का विस्तार भी आवश्यक माना जा रहा है। वर्षा ऋतु में भूस्खलन, हिमाली भूगोल और कमजोर आधारभूत संरचना इस सड़क की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए चुनौती बने हुए हैं। इस वर्ष भी कई स्थानों पर हुए भूस्खलन को हटाने के लिए सेना को अतिरिक्त प्रयास करना पड़ा।
अब तक इस परियोजना पर ६२ करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुका है। यह सड़क पूर्वी नेपाल के आर्थिक भविष्य से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ती दिखाई दे रही है। यदि नेपाल इस मार्ग का रणनीतिक ढंग से उपयोग कर सके, तो खाँदबारी–किमाथाङ्का सड़क केवल एक पहाड़ी सड़क नहीं, बल्कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय संपर्क की महत्वपूर्ण धुरी के रूप में स्थापित हो सकती है।

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