नई दिल्ली: भारत सरकार ने चीन के सहयोग से इस वर्ष की कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जून से अगस्त के बीच होने वाली यह यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथुला दर्रे के माध्यम से आयोजित की जाएगी। यात्रा की बहाली के साथ ही भारत और चीन ने जून २०२६ से लिपुलेख के रास्ते आपसी व्यापार को भी फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। चूंकि नेपाल लिपुलेख क्षेत्र पर अपना संप्रभु दावा करता रहा है, इसलिए भारत और चीन के बीच हुआ यह समझौता काठमांडू और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक संबंधों में खटास पैदा कर सकता है।
मार्च २०२६ में सत्ता संभालने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के लिए यह स्थिति एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा मानी जा रही है। विवाद की मुख्य जड़ १८१६ की सुगौली संधि है, जिसमें नेपाल काली नदी का उद्गम लिम्पियाधुरा को मानते हुए लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता है, जबकि भारत इन दावों को खारिज करते हुए इसे उत्तराखंड का अभिन्न अंग मानता है। नेपाल द्वारा हाल ही में अपने करेंसी नोट पर विवादित क्षेत्रों वाला नक्शा जारी करने के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चीन की इस सक्रियता पर नेपाल सरकार कड़ी आपत्ति दर्ज करा सकती है और लिपुलेख में अपनी प्रशासनिक उपस्थिति को पुख्ता करने के लिए कदम उठा सकती है।










