नई दिल्ली: ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (आईआरजीसी) के नए प्रमुख के रूप में नियुक्त किए गए ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी की लंबी अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मार्च की शुरुआत में उन्हें इस शीर्ष पद पर नियुक्त किए जाने की खबरें तो आईं, लेकिन आधिकारिक तौर पर उनकी सक्रियता कहीं नजर नहीं आ रही है। फरवरी के बाद से वे किसी भी सार्वजनिक मंच या मीडिया रिपोर्ट में दिखाई नहीं दिए हैं, जो एक सैन्य प्रमुख के लिहाज से बेहद असामान्य है।
यह रहस्य इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि आईआरजीसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी लगातार रैलियों और सैन्य ठिकानों के दौरों में सक्रिय नजर आ रहे हैं। वाहिदी की इस गुमशुदगी के पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि उनके राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ के साथ गहरे नीतिगत मतभेद हैं। वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी हमलों की धमकियों के बीच इसे एक सुरक्षा रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है, ताकि शीर्ष नेतृत्व को संभावित निशानों से बचाया जा सके।
ईरान में सर्वोच्च नेता के उत्तराधिकार की प्रक्रिया और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अहमद वाहिदी का इस तरह ओझल रहना, ईरान के आंतरिक सत्ता समीकरणों में किसी बड़ी हलचल की ओर इशारा करता है। फिलहाल, वाहिदी की चुप्पी ने ईरान के सैन्य और राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।










