ड्रोन हमले से दहला कुवैत: मीना अल-अहमदी रिफाइनरी में लगी आग

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दुबई: ईरान ने शुक्रवार को कुवैत की मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला किया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। सरकारी कंपनी कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि दमकलकर्मी आग पर काबू पाने में जुटे हैं। कंपनी के अनुसार इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
कुवैत में कुल तीन तेल रिफाइनरियां हैं, जिनमें मीना अल-अहमदी रिफाइनरी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। युद्ध के दौरान इस रिफाइनरी पर कई बार हमले हो चुके हैं। ये रिफाइनरियां देश के तेल उत्पादन की रीढ़ हैं, क्योंकि इनके बिना तेल कुओं से निकाले गए कच्चे तेल का प्रसंस्करण और निर्यात संभव नहीं होता। यदि रिफाइनरी बंद हो जाएं तो उत्पादन ठप पड़ सकता है और उन्हें पुनः शुरू करने में लंबा समय लगता है।
विलवणीकरण संयंत्र भी बना निशाना!
कुवैत ने यह भी बताया कि हमले के दौरान एक विलवणीकरण संयंत्र के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। खाड़ी क्षेत्र के देशों के लिए विलवणीकरण संयंत्र जीवनरेखा की तरह हैं, क्योंकि इनके माध्यम से खारे समुद्री पानी को पीने योग्य बनाया जाता है।
कुवैत में पीने के पानी का लगभग ९० प्रतिशत हिस्सा इसी प्रक्रिया से प्राप्त होता है। इस युद्ध के दौरान विलवणीकरण संयंत्र प्रमुख निशाना बनते जा रहे हैं। पहले ईरान ने अमेरिका और इजराइल पर एक संयंत्र पर हमला करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद खाड़ी देशों के संयंत्रों को निशाना बनाया जाने लगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नया कदम:
इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि वह ओमान के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार इस प्रस्ताव का उद्देश्य इस समुद्री मार्ग को जहाजों के आवागमन के लिए सुरक्षित और सुगम बनाना है।
हालांकि क्षेत्र में जहाजों पर हमलों और इस मार्ग से गुजरने के लिए कथित रूप से भारी शुल्क की मांग के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रस्ताव के प्रभाव और इसके स्वरूप को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, वहीं ओमान ने भी इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है, जहां से जहाजों का निर्बाध आवागमन अपेक्षित होता है।
ईरानी राजनयिक काजिम घारीबबादी ने कहा कि वर्तमान युद्ध की स्थिति में नौवहन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है और शांतिकाल के नियमों का पालन करना संभव नहीं है।

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