कोलकाता: उन्नत नवजात चिकित्सा और विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए फोर्टिस अस्पताल आनंदपुर, कोलकाता ने ३५ सप्ताह की गर्भावधि में जन्मे एक गंभीर रूप से बीमार प्री-टर्म शिशु का सफल उपचार कर उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दी। नवजात गंभीर श्वसन संकट और एक दुर्लभ, बहु-दवा-प्रतिरोधी जीवाणु संक्रमण से पीड़ित था।
लगभग २ किलोग्राम वजन के साथ जन्मे इस शिशु को जन्म के तुरंत बाद तीव्र सांस लेने में कठिनाई होने लगी, जिसके कारण पहले २४ घंटों के भीतर वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता पड़ी। स्थिति बिगड़ने पर शिशु को उन्नत उपचार के लिए फोर्टिस अस्पताल आनंदपुर रेफर किया गया।
भर्ती के समय शिशु की हालत अत्यंत नाजुक थी और उसे जीवनरक्षक कार्यों के लिए १०० प्रतिशत ऑक्सीजन तथा उच्च वेंटिलेशन प्रेशर की आवश्यकता थी। कंसल्टेंट – पीडियाट्रिक्स एवं नियोनैटोलॉजी, डॉ. सुमिता साहा के नेतृत्व में एनआईसीयू की बहु-विषयक टीम ने तत्काल गहन निगरानी और विशेष जीवन-रक्षक उपचार शुरू किया। लगभग १६ दिनों तक शिशु को वेंटिलेशन पर रखा गया।
जांच के दौरान शिशु में एलिज़ाबेथकिंगिया मेनिंगोसेप्टिका नामक दुर्लभ और अत्यधिक दवा-प्रतिरोधी जीवाणु संक्रमण का पता चला। संक्रमण के कारण शिशु शॉक की स्थिति में चला गया, जिससे रक्तचाप और हृदय क्रिया को बनाए रखने के लिए लगातार दवाओं की आवश्यकता पड़ी। आवश्यक दवाओं और तरल पदार्थों के लिए अम्बिलिकल वेनस कैथेटर लगाया गया।
इसके अतिरिक्त, शिशु में पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) और पर्सिस्टेंट पल्मोनरी हाइपरटेंशन ऑफ द न्यूबॉर्न (PPHN) जैसी गंभीर हृदय एवं फेफड़ों से संबंधित जटिलताएँ भी पाई गईं, जिनका एनआईसीयू टीम ने समय पर और सफलतापूर्वक प्रबंधन किया।
लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप शिशु की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। १६ दिनों के बाद उसे इनवेसिव वेंटिलेशन से हटाकर क्रमशः सीपीएपी और फिर हाई-फ्लो नेजल ऑक्सीजन पर लाया गया। ३६ दिनों की गहन एनआईसीयू देखभाल के पश्चात शिशु को स्थिर, स्वस्थ और स्वयं सांस लेने में सक्षम अवस्था में छुट्टी दे दी गई।
डॉ. सुमिता साहा ने कहा, “यह हमारे अब तक के सबसे चुनौतीपूर्ण नवजात मामलों में से एक था। पूरी एनआईसीयू टीम के समन्वित प्रयास और समय पर किए गए चिकित्सकीय हस्तक्षेप से यह संभव हो सका।”
फोर्टिस अस्पताल कोलकाता के फैसिलिटी डायरेक्टर श्री आशीष मुखर्जी ने इसे अस्पताल की उन्नत नवजात देखभाल और मानवीय प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बताया।









