नई दिल्ली: मदर टेरेसा को कौन नहीं जानता। यह विनम्र और स्नेहमयी मां एक रोमन कैथोलिक नन थीं और उन्होंने जीवन भर गरीब, अनाथ, लाचार और बीमार लोगों की तीमारदारी की। उन्होंने कलकत्ता (अब कोलकाता) में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की और दुनियाभर में इसके केंद्रों की स्थापना कर ज्यादा से ज्यादा लोगों की सेवा करने के अपने संकल्प को आगे बढ़ाया। उन्हें १७ अक्टूबर १९७९ को शांति के लिये नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
भारत से विशेष रूप से स्नेह रखने वाली मदर टेरेसा ने १९४८ में स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता ली और १९८० में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
देश-दुनिया के इतिहास में १७ अक्टूबर की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है~
१८७०: इस दिन कलकत्ता बंदरगाह के प्रबंधन को एक आधिकारिक और संवैधानिक निकाय के अधीन किया गया था। बंदरगाह के बेहतर विकास, रखरखाव और व्यापार संचालन को व्यवस्थित करने के लिए ‘कलकत्ता पोर्ट ट्रस्ट’ की स्थापना की गई थी। इस संवैधानिक बदलाव के तहत बंदरगाह की कमान कमिश्नर्स के एक समूह को सौंपी गई थी।
१८७४: हुगली नदी पर पहला पंटून पुल (पीपे का पुल) यातायात के लिए खोला गया था, जिसने कोलकाता (तब कलकत्ता) और हावड़ा को पहली बार सड़क मार्ग से जोड़ा था। इस पंटून पुल का डिजाइन सर ब्रैडफोर्ड लेस्ली ने तैयार किया था। उस समय इसे बनाने में लगभग २२ लाख रुपये की लागत आई थी। यह पुल जहाजों की आवाजाही के लिए बीच से खोला जा सकता था। बढ़ती आबादी और भारी वाहनों के ट्रैफिक को संभालने के लिए बाद में इसी पुल की जगह एक नए कैंटिलीवर ब्रिज का निर्माण शुरू हुआ, जिसे आज हम हावड़ा ब्रिज (रवीन्द्र सेतु) के नाम से जानते हैं। यह नया पुल फरवरी १९४३ में जनता के लिए खोला गया था।
१८८८: महान अमेरिकी वैज्ञानिक और आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन ने ‘ऑप्टिकल फोनोग्राफ’ के पेटेंट के लिए आवेदन किया था। यह आविष्कार ध्वनि और दृश्यों को एक साथ रिकॉर्ड करने और उन्हें रिकॉर्डेड रूप में चलाने की शुरुआती कोशिश थी, जिसने आगे चलकर चलचित्र के विकास की नींव रखी। एडिसन का यह विचार बाद में ‘किनेटोस्कोप’ के रूप में विकसित हुआ, जो शुरुआती समय में मोशन पिक्चर देखने का एक लोकप्रिय साधन बना।
१९१२: बुल्गारिया, यूनान (ग्रीस) और सर्बिया ने ओटोमन साम्राज्य के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी थी। इस युद्ध की शुरुआत सबसे पहले ८ अक्टूबर १९१२ को मोंटेनेग्रो द्वारा ओटोमन साम्राज्य पर युद्ध की घोषणा के साथ हुई थी। यूनान, सर्बिया और मोंटेनेग्रो ने मिलकर ‘बाल्कन लीग’ नामक एक सैन्य गठबंधन बनाया था, जिसका उद्देश्य ओटोमन साम्राज्य को यूरोप में उसके शेष क्षेत्रों से बाहर खदेड़ना था। इस संयुक्त घोषणा के साथ ही प्रथम बाल्कन युद्ध की शुरुआत हुई।
१९१७: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने जर्मनी पर पहली बार हवाई हमले किए थे। प्रथम विश्व युद्ध पहला ऐसा बड़ा संघर्ष था जिसमें हवाई जहाजों और बमवर्षकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।
१९१८: यूगोस्लाविया ने खुद को एक गणतंत्र देश घोषित किया था। यह घटना प्रथम विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के विघटन के दौरान हुई थी, जिसके बाद दक्षिण स्लाव क्षेत्रों को मिलाकर एक स्वतंत्र राष्ट्र की नींव रखी गई।
१९२०: ताशकंद (तत्कालीन सोवियत संघ, वर्तमान उज्बेकिस्तान) में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्थापना हुई थी। इस समूह में ७ सदस्य शामिल थे। इनके नाम हैं: एम. एन. रॉय, एवलिन रॉय-ट्रेंट, ए. एन. मुखर्जी, रोजा फिटिंगोव, मोहम्मद अली (अहमद हसन), मोहम्मद शफीक सिद्दीकी (जिन्हें पार्टी का सचिव चुना गया), आचार्य (एम. प्रतिवादी भयंकर – जिन्हें अध्यक्ष चुना गया)।
१९३३: महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन नाजी जर्मनी से भागकर हमेशा के लिए अमेरिका चले गए थे। जर्मनी में एडॉल्फ हिटलर और नाजी पार्टी के सत्ता में आने के बाद यहूदियों का उत्पीड़न शुरू हो गया था। आइंस्टीन एक यहूदी थे, जिस वजह से वे नाजियों के निशाने पर आ गए थे। नाजी सरकार ने आइंस्टीन के सिद्धांतों को “यहूदी विज्ञान” कहकर खारिज कर दिया था, उनकी किताबों को जला दिया गया था और उन पर इनाम तक घोषित कर दिया गया था। सुरक्षा कारणों से आइंस्टीन ने जर्मनी छोड़ने का फैसला किया। अमेरिका पहुंचने के बाद वे न्यू जर्सी के प्रिंसटन में इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी से जुड़ गए। उन्होंने बाद में अपनी जर्मन नागरिकता छोड़ दी और साल १९४० में वे आधिकारिक तौर पर अमेरिकी नागरिक बन गए। उन्होंने अपना बाकी का जीवन अमेरिका में ही बिताया।
१९४०: महात्मा गांधी के नेतृत्व में महाराष्ट्र के पवनार आश्रम (वर्धा के निकट) से व्यक्तिगत सत्याग्रह (जिसे ‘दिल्ली चलो आंदोलन’ भी कहा जाता है) की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के इस दावे को झूठा साबित करना कि भारतीय जनता बिना किसी शर्त के द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों के साथ है, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना था।
१९४१: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन पनडुब्बी (यू-५६८) ने आइसलैंड के पास अमेरिकी विध्वंसक पोत यूएसएस केर्नी (यूएसएस केर्नी – डीडी-४३२) पर टॉरपीडो से हमला किया था। इस हमले में पोत क्षतिग्रस्त हो गया और अमेरिकी नौसेना के ११ कर्मियों की मौत हुई तथा २२ घायल हुए थे।
१९४९: भारतीय संविधान सभा ने जम्मू-कश्मीर को विशेष और अस्थायी संवैधानिक स्वायत्तता प्रदान करने वाले अनुच्छेद ३७० (प्रारंभ में मसौदा अनुच्छेद ३०६A) को मंजूरी दी थी। इसे एन. गोपालस्वामी अय्यंगार द्वारा संविधान सभा में पेश किया गया था। इसके तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को अपना एक अलग संविधान बनाने, अलग झंडा रखने और आंतरिक प्रशासन चलाने की अनुमति मिली थी।
१९६८: मेक्सिको सिटी ओलंपिक में अमेरिका के दो अश्वेत खिलाड़ियों—टॉमी स्मिथ (स्वर्ण पदक विजेता) और जॉन कार्लोस (कांस्य पदक विजेता)—ने २०० मीटर दौड़ के पदक वितरण समारोह के दौरान अमेरिकी राष्ट्रगान बजने पर अपनी काली दस्ताने पहनी मुट्ठियाँ आसमान में उठाकर रंगभेद और नस्लवाद के खिलाफ ऐतिहासिक मौन विरोध व्यक्त किया था। रजत पदक जीतने वाले ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी पीटर नॉर्मन ने भी उन दोनों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए अपने कोट पर ‘ओलंपिक प्रोजेक्ट फॉर ह्यूमन राइट्स’ का बैज लगाया था।
१९७९: मदर टेरेसा को पीड़ित मानवता की सहायता और गरीबी से जूझने के उनके कार्यों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया था। उन्होंने पुरस्कार समारोह की पारंपरिक भोज (बैंकट) पार्टी रद्द करवा दी थी और उसके $१,९२,००० की राशि को भारत के गरीबों के लिए देने का आग्रह किया था।
१९९४: भारत के महान ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान कपिल देव ने अपने शानदार वनडे करियर का आखरी मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ फरीदाबाद के नाहर सिंह स्टेडियम में खेला था। वेस्टइंडीज ने यह मैच ९६ रनों से जीता था। कपिल देव ने इस मैच में अपने कोटे के १० ओवरों में ५४ रन देकर १ विकेट (कीथ आर्थरटन का) लिया था।
२०००: मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित पश्चिम एशिया शांति शिखर सम्मेलन समाप्त हुआ था, जहाँ इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच हिंसा को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा दिए गए तीन मुख्य सूत्रों (हिंसा पर तुरंत रोक, स्थिति को पूर्ववत करना, भविष्य की बातचीत का मार्ग) पर सहमति बनी थी। यह वार्ता सितंबर २००० के अंत में शुरू हुए ‘अल-अक्सा इंतिफ़ादा’ (दूसरा फिलिस्तीनी विद्रोह) के हिंसक दौर के बीच बुलाई गई थी। इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, इज़राइल के प्रधानमंत्री एहुद बराक, फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात और मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक शामिल हुए थे।
२००३: चीन का पहला मानव मिशन अंतरिक्ष यान ‘शेंझोउ ५’ अंतरिक्ष यात्री यांग लिवेई के साथ सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लौटा था।
२००३: ऑस्ट्रेलियाई-मेक्सिकन मूल के ब्रिटिश लेखक डीबीसी पियरे को उनके पहले ही उपन्यास ‘वेर्नोन गॉड लिटिल’ के लिए साल २००३ का प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार दिया गया था। यह उपन्यास एक डार्क कॉमेडी (व्यंग्य) है, जो अमेरिका के टेक्सास में हुए एक स्कूल शूटआउट की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
२००३: पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ की गई कार्रवाई के तहत इसके एक प्रमुख कमांडर और मसूद अजहर के पूर्व सहयोगी अब्दुल जब्बार को पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था।
२००३: पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ की हत्या की साजिश रचने में शामिल तीन दोषियों को १०-१० साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला अप्रैल २००२ का था, जब कराची में परवेज मुशर्रफ़ के काफिले के गुजरने वाले रास्ते पर एक कार बम प्लांट किया गया था। हालांकि, रिमोट कंट्रोल में खराबी आने के कारण वह धमाका नहीं हो सका और मुशर्रफ़ बाल-बाल बच गए थे।
२००४: न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क भारत की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुँची थीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड लांगे की १९८५ की यात्रा के बाद, करीब १९ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद न्यूजीलैंड के किसी प्रधानमंत्री का यह पहला भारत दौरा था। प्रधानमंत्री क्लार्क के साथ उनके पति प्रोफेसर पीटर डेविस, सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल और न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि भी आए थे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, सूचना प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना था। दिल्ली में उन्होंने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से मुलाकात कर द्विपक्षीय वार्ता की थी।
२००४: क्यूबा में स्थित अमेरिकी नौसेना के गुआंतानामो बे बंदीगृह में अमेरिकी सैनिकों द्वारा बंदियों को दी जाने वाली अमानवीय यातनाओं का बड़ा रहस्योद्घाटन हुआ था। बंदियों को अत्यधिक ठंडे तापमान में रखना, लंबे समय तक एकांत कारावास में बंद रखना, तेज आवाज (संगीत) के जरिए सोने न देना और मारपीट जैसी अमानवीय तकनीकों का उपयोग शामिल था। इस बंदीगृह की शुरुआत जनवरी २००२ में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के प्रशासन द्वारा की गई थी। ११ सितंबर २००१ (९/११) के आतंकवादी हमलों के बाद अमेरिका द्वारा शुरू किए गए “आतंकवाद के खिलाफ युद्ध” के तहत पकड़े गए संदिग्धों को यहाँ रखा गया था।
२००७: आयरिश लेखिका ऐनी एनराइट को उनके उपन्यास ‘द गैदरिंग’ के लिए वर्ष २००७ में प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह उपन्यास एक आयरिश परिवार और उसमें घटी एक त्रासदी के बाद उपजे दर्द, पारिवारिक इतिहास और शोक की कहानी पर आधारित है।
२००८: एकाधिकार व प्रतिबंधित व्यापार आयोग ने दो बड़ी निजी विमानन कंपनियों, किंगफिशर एयरलाइंस और जेट एयरवेज के बीच हुए गठबंधन की जांच के आदेश दिए थे। इस जांच का मुख्य कारण यह था कि आयोग को संदेह था कि इस गठबंधन के कारण बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म हो सकती है, जो एकाधिकार को बढ़ावा देगी और उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुँचाएगी।
२००९: हिंद महासागर में स्थित मालदीव में पानी के अंदर दुनिया की पहली कैबिनेट बैठक हुई थी। इस बैठक की अध्यक्षता मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने की थी। यह बैठक राजधानी माले के पास गिरिफुशी द्वीप के समुद्र में लगभग ४ मीटर (२० फीट) की गहराई पर आयोजित की गई थी। कोपेनहेगन में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन से पहले, ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र के बढ़ते जलस्तर से मालदीव जैसे निचले द्वीपीय देशों को होने वाले अस्तित्व के खतरे की ओर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करना था।
२०२०: जैसिंडा आर्डर्न के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने न्यूजीलैंड के आम चुनाव में ऐतिहासिक और भारी बहुमत हासिल किया था।
२०२३: गाजा के अल-अहली अरब अस्पताल में विस्फोट हुआ था। बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की इस घटना की जिम्मेदारी और विस्फोट के कारण को लेकर पक्षों के बीच विवाद हुआ था।
२०२४: इजरायली सेना ने जानकारी दी थी कि हमास के नेता याह्या सिनवार गाजा में हुए सैन्य अभियान में मारे गए थे। उन्हें ७ अक्टूबर २०२३ को इजराइल पर हुए हमास के हमले के मुख्य योजनाकारों में से एक माना जाता था। हालांकि, उनकी मृत्यु की पुष्टि इजराइल ने १७ अक्टूबर को सार्वजनिक की थी; घटना का समय और घोषणा का समय अलग-अलग थे।
२०२५ तक: १७ अक्टूबर को विश्व इतिहास में ऊर्जा संकट, राजनीतिक आंदोलनों, विज्ञान की उपलब्धियों और प्राकृतिक आपदा की घटनाओं से जोड़कर याद किया जाता है। ऊपर दी गई घटनाओं में तेल संकट, लोमा प्रिएटा भूकंप और लेबनान का जनआंदोलन इस दिन से जुड़े विशेष रूप से चर्चित प्रसंग हैं।
१७ अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति~
१८१७: सर सैयद अहमद ख़ाँ, अलीगढ़ ओरिएंटल कॉलेज के संस्थापक
१८७७: सिस्टर यूप्रासिआ, भारतीय ईसाई महिला संत
१८९२: आर. के. शनमुखम चेट्टी – राजनीतिज्ञ एवं स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री।
१९२३: शिवानी – सुप्रसिद्ध उपन्यासकार
१९२९: चंद्रशेखर रथ – ओडिशा के सुप्रसिद्ध कथाकार व साहित्यकार
१९३१: एस. सी. जमीर – नागालैंड के भूतपूर्व छठे मुख्यमंत्री रहे हैं।
१९३६: दूधनाथ सिंह, हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार
१९५५: स्मिता पाटिल – हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री
१९७०: अनिल कुंबले – भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
१७ अक्टूबर को हुए निधन~
२०१८: अरुण भादुड़ी – प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायक थे।
१९९८: लल्लन प्रसाद सिंह – भारत के पाँच राज्यों के राज्यपाल रहे थे।
१९०६: स्वामी रामतीर्थ – हिन्दू धार्मिक नेता थे, जो अत्यधिक व्यक्तिगत और काव्यात्मक ढंग के व्यावहारिक वेदांत को पढ़ाने के लिए विख्यात थे।
१७ अक्टूबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव~
राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह)
विश्व आघात दिवस





