सशक्त लोकतंत्र के लिए जिम्मेदार और साहसी पत्रकारिता अनिवार्य: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

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नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि एक जीवंत लोकतंत्र के लिए जिम्मेदार पत्रकारिता और साहसी प्रेस अनिवार्य स्तंभ हैं। नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित ‘ऑर्गनाइज़र वीकली’ के ८०वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने यह बात कही।
​उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने अपने सोशल मीडिया पेज पर इस कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए आपातकाल (इमर्जेंसी) के दौरान इस पत्रिका के कड़े रुख और सेंसरशिप के खिलाफ इसके ऐतिहासिक संघर्ष को याद किया।
​उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब प्रेस साहस, जिम्मेदारी और उच्चतम पेशेवर मानकों का पालन करते हुए जनता को जागरूक करता है, सवाल पूछता है और एक स्वस्थ सार्वजनिक बहस को बढ़ावा देता है।
​इस गरिमामयी अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह (महासचिव) श्री दत्तात्रेय होसबोले, भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक श्री अरुण कुमार गोयल, आर्गनाइजर के संपादक श्री प्रफुल्ल केतकर सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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