काठमांडू: प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) सरकार ने अपने पहले नीति और कार्यक्रम के माध्यम से सुशासन को समृद्धि की मुख्य ‘आधारशिला’ घोषित किया है। सोमवार को राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने संघीय संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में उक्त नीति और कार्यक्रम प्रस्तुत किया। पिछले चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद सत्ता में आई रास्वपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र के मुख्य मुद्दों को इसमें प्राथमिकता दी है।
प्रमुख घोषणाएं
नीति और कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति अपनाते हुए सार्वजनिक सेवा वितरण में व्यापक सुधार की प्रतिबद्धता जताई गई है। सरकार ने आने वाले दशक को ‘रोजगार संवर्धन दशक’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही, संविधान संशोधन के लिए साझा मुद्दों की पहचान करने हेतु ‘बहस पत्र’ तैयार करने और राजनीतिक दलों के साथ संवाद करने की बात कही गई है। मध्यम वर्गीय परिवारों और उद्यमियों को राहत देने के लिए कर संरचना की समीक्षा करने तथा सहकारी पीड़ितों की बचत वापस दिलाने के विषय को भी सरकार ने शामिल किया है।
विपक्ष का कड़ा प्रहार और विरोध
नीति और कार्यक्रम प्रस्तुत होने से पहले संसद में विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यशैली की तीखी आलोचना की। मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के सचेतक निश्कल राई ने संवैधानिक परिषद से संबंधित अध्यादेश पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री को असीमित शक्ति देता है। वहीं, नेकपा एमाले की नेता पद्मा अर्याल ने सुकुम्वासी बस्तियों पर ‘डोजर आतंक’ चलाने के लिए सरकार की निंदा की। श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्क साम्पाङ ने लिपुलेख जैसे सीमा विवादों पर सरकार की चुप्पी और कूटनीतिक विफलता पर सवाल उठाए।











