नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस के अभेद्य किले को ढहाते हुए सत्ता तक पहुँचने में जो कामयाबी हासिल की है, उसका श्रेय काफी हद तक शुभेंदु अधिकारी को जाता है। चुनाव परिणामों के रुझानों में बीजेपी बहुमत का आँकड़ा पार कर चुकी है और यह लगभग तय माना जा रहा है कि पार्टी पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाने जा रही है। अपनी राजनीतिक सक्रियता और आक्रामक तेवरों की वजह से केंद्रीय नेतृत्व की पसंद बने शुभेंदु अब मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभरे हैं।
शुभेंदु अधिकारी को साल २०२० तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद पार्टी में नंबर दो की हैसियत हासिल थी, लेकिन अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव के कारण वे धीरे-धीरे हाशिए पर चले गए और फिर २०२१ के चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होने के महज चार महीने के भीतर हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी को ३ से ७७ सीटों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि उस समय बीजेपी का ‘दो सौ पार’ का सपना अधूरा रह गया था, लेकिन ३ से ७७ तक का सफर किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था।
अब पाँच साल बाद बीजेपी ने ममता बनर्जी की १५ साल पुरानी सरकार को उखाड़ फेंकते हुए बंगाल की सत्ता पर कब्ज़ा जमा लिया है। शुभेंदु अधिकारी की ज़मीनी पकड़ ने बीजेपी के उस पुराने सपने को भी साकार कर दिया है जिसके तहत पार्टी ‘अंग-बंग और कलिंग’ यानी बिहार, बंगाल और ओडिशा पर पूर्ण वर्चस्व चाहती थी। बिहार और ओडिशा में पहले से मजबूत बीजेपी के लिए अब बंगाल की जीत ने पूर्वी भारत में उसकी राजनीतिक पकड़ को ऐतिहासिक मजबूती प्रदान की है।









