न्यूयोर्क: फीफा विश्व कप २०२६ के फाइनल में स्पेन ने अतिरिक्त समय के खेल में अर्जेंटीना को १-० से पराजित कर खिताब अपने नाम कर लिया है। खिताबी जीत के बाद आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में स्पेन के कप्तान रोड्री को प्रतिष्ठित ‘गोल्डन बॉल’ पुरस्कार से नवाजा गया। हालांकि, रोड्री को यह पुरस्कार दिए जाने के तुरंत बाद इस फैसले को लेकर फुटबॉल जगत में बहस छिड़ गई है। कई लोगों का मानना है कि अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेस्सी अपने असाधारण प्रदर्शन के कारण इस सम्मान के असली हकदार थे।
बहस का यह नजारा उस समय भी देखने को मिला जब रोड्री गोल्डन बॉल लेने मंच पर पहुंचे, तो पूरा स्टेडियम ‘मेस्सी… मेस्सी…’ के नारों से गूंज उठा। इससे साफ है कि प्रशंसकों का एक वर्ग फीफा के इस फैसले से सहमत नहीं है। लियोनेल मेस्सी ने पूरे टूर्नामेंट में ८ गोल और ४ असिस्ट के साथ अर्जेंटीना को लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंचाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें टूर्नामेंट में रिकॉर्ड ५ बार ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ भी चुना गया। मेस्सी अंततः गोल्डन बूट की दौड़ में दूसरे स्थान पर रहे, जिसके चलते उन्हें ‘सिल्वर बॉल’ के साथ ‘सिल्वर बूट’ प्राप्त हुआ।
दूसरी ओर, रोड्री ने पूरे टूर्नामेंट में स्पेन की कप्तानी करते हुए सभी ८ मैचों में हिस्सा लिया और मिडफील्ड से टीम के खेल को पूरी तरह नियंत्रित किया। भले ही उनके नाम के साथ कोई बड़ा व्यक्तिगत आंकड़ा (गोल या असिस्ट) न जुड़ा हो, लेकिन वे स्पेनिश टीम के खेल का मुख्य केंद्र रहे और टीम को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। फीफा के टेक्निकल स्टडी ग्रुप ने स्पेन को चैंपियन बनाने में रोड्री के समग्र प्रभाव को मेस्सी के आक्रामक प्रदर्शन से अधिक महत्व दिया, जिसके कारण रोड्री गोल्डन बॉल जीतने में सफल रहे।
स्पेन का रहा दबदबा, एम्बाप्पे को गोल्डन बूट
इस विश्व कप के व्यक्तिगत पुरस्कारों में चैंपियन स्पेनिश टीम का पूरी तरह दबदबा रहा। व्यक्तिगत पुरस्कारों के तहत रोड्री ने ‘गोल्डन बॉल’, मेस्सी ने ‘सिल्वर बॉल’ और फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने ‘ब्रॉन्ज बॉल’ जीता। वहीं, पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए १० गोल दागने वाले एम्बाप्पे ने ‘गोल्डन बूट’ पर कब्जा जमाया। मेस्सी ८ गोल के साथ ‘सिल्वर बूट’ और इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम ७ गोल के साथ ‘ब्रॉन्ज बूट’ जीतने में सफल रहे।
रक्षापंक्ति और गोलकीपिंग में भी स्पेन का सिक्का चला। पूरे टूर्नामेंट में केवल एक गोल खाने वाले स्पेनिश गोलकीपर उनाई सिमोन को ‘गोल्डन ग्लव्स’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। टूर्नामेंट में उनके नाम ७ क्लीन शीट रही। इसके साथ ही स्पेन के १९ वर्षीय युवा डिफेंडर पाउ कुबार्सी को ‘सर्वश्रेष्ठ उभरते खिलाड़ी’ (इमर्जिंग प्लेयर) का पुरस्कार मिला। वहीं, खेल भावना के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित ‘फीफा फेयर प्ले ट्रॉफी’ नीदरलैंड्स के हिस्से गया। डच टीम ने पूरे टूर्नामेंट में खेले ४ मैचों के दौरान केवल ३ पीले कार्ड (येलो कार्ड) देखें।











