विश्वविद्यालयों से दलीय ढांचा हटाने के लिए बालेन का ‘निर्णायक’ कदम, कुलपतियों को दिए कड़े निर्देश

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काठमांडू: ​नेपाल के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक दलों के भ्रातृ संगठनों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए प्रधानमंत्री एवं कुलपति वालेंद्र शाह ने निर्णायक पहल शुरू कर दी है। सोमवार को कुलपतियों के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री शाह ने शैक्षणिक संस्थानों में सक्रिय दलीय छात्र और कर्मचारी संगठनों के ढांचे को तत्काल हटाने का निर्देश दिया। सरकार की शासकीय सुधार योजना के तहत ६० दिनों के भीतर शिक्षण संस्थानों के परिसर से दलीय संरचनाओं और बोर्डों को हटाने के निर्णय को किसी भी कीमत पर लागू करने के लिए उन्होंने स्पष्ट आदेश दिए हैं।
​प्रधानमंत्री के इस निर्देश के बाद वर्षों से दलीय राजनीति के केंद्र बने शैक्षणिक संस्थानों में खलबली मच गई है। बैठक में शामिल काठमांडू विश्वविद्यालय के कुलपति अच्युत वाग्ले के अनुसार, प्रधानमंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों में तालाबंदी और राजनीतिक हस्तक्षेप को समाप्त कर अकादमिक वातावरण बनाने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने यह आश्वासन भी दिया है कि यदि दलीय संगठन काम में बाधा डालने की कोशिश करते हैं, तो सरकार संस्थानों और पदाधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करेगी। अधिकांश कुलपतियों ने प्रधानमंत्री के इस रुख का समर्थन किया है और समय पर परीक्षा फल प्रकाशित करने तथा शैक्षणिक कैलेंडर में सुधार करने की प्रतिबद्धता जताई है।
​हालांकि, राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने सरकार के इस कदम पर तीव्र असंतोष और संदेह व्यक्त किया है। कुछ संगठनों ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए प्रतिरोध की चेतावनी दी है, जिससे शैक्षणिक संस्थानों में टकराव की स्थिति पैदा होने की आशंका बढ़ गई है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री शाह का मानना है कि दलीय संगठनों के बजाय ‘स्टूडेंट काउंसिल’ या ‘वॉइस ऑफ स्टूडेंट’ जैसे विशुद्ध छात्र हित के तंत्र विकसित किए जाने चाहिए।
​बैठक में शामिल कुलपतियों ने युवा प्रधानमंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनका प्रस्तुतीकरण शिष्ट और विषय पर केंद्रित था। सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय के कुलपति हेमराज पंत और नास्ट के कुलपति दिलीप सुब्बा ने अनुभव साझा किया कि प्रधानमंत्री दूसरों की बातों को धैर्यपूर्वक सुनते हैं और अपनी बात सटीक ढंग से रखते हैं। पिछली सरकारों द्वारा नियुक्त कुलपतियों को भी प्रधानमंत्री ने ‘काम करें, सरकार आपके साथ है’ कहकर प्रोत्साहित किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय अपनी नियमावली में संशोधन कर दलीय ढांचों को हटाने की प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाते हैं।

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