काठमांडू: बालेन शाह के नेतृत्व वाली नवगठित सरकार में मंत्री नियुक्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया है। विशेष रूप से श्रम मंत्री के रूप में नियुक्त दिपक कुमार शाह की पिछली गतिविधियों के कारण सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में आलोचना बढ़ी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिपक कुमार शाह को वि.सं. २०७३ असोज १२ को धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्होंने काठमांडू के पुतली सड़क क्षेत्र में ‘वर्ल्ड वाइड कंसल्टेंसी’ चलाते हुए MBBS परीक्षा पास कराने का लालच देकर लोगों से बड़ी रकम ली।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि उन्होंने खुद को ‘डॉक्टर’ बताकर जनता को भ्रमित किया। पुलिस के अनुसार वह असली डॉक्टर नहीं थे और धोखाधड़ी के लिए नकली पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे।
इस तरह की पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को श्रम और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी देना सरकार की नैतिकता और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है। विशेष रूप से विदेश रोजगार जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस बीच, प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मंत्रियों को निर्देश दिया था कि अगर काम नहीं कर सकते तो पद छोड़ दें। फिर भी, विवादित नियुक्तियों के कारण उनकी निर्णय क्षमता पर जनता और राजनीतिक विश्लेषकों में बहस बढ़ी है।
अभी तक इस विषय में प्रधानमंत्री कार्यालय या श्रम मंत्री शाह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस निर्णय को लेकर तीव्र बहस जारी है।









