भद्रपुर :नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ५ से ७ जून २०२६ तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और नेपाल अपने पारंपरिक रिश्तों को नई मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे सीमा विवाद अब भी दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दे बने हुए हैं. खनाल का यह दौरा भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर हो रहा है और इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
नई दिल्ली में होने वाली वार्ता के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्री व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग, सीमा पार कनेक्टिविटी, जल संसाधन और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे. हालांकि, राजनीतिक और रणनीतिक हलकों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि क्या सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर कोई सकारात्मक संकेत सामने आता है.
भारत और नेपाल के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आधार पर बेहद मजबूत रहे हैं. दोनों देशों के बीच खुली सीमा, व्यापक व्यापारिक गतिविधियां और करोड़ों लोगों के पारिवारिक व सामाजिक रिश्ते इस साझेदारी को विशेष बनाते हैं. इसके बावजूद वर्ष 2020 में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर विवाद गहरा गया था, जब नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी कर इन क्षेत्रों को अपना हिस्सा बताया था. भारत ने उस दावे को स्वीकार नहीं किया और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर मतभेद सामने आए.
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में दोनों देशों ने विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने और सहयोग के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है. यही वजह है कि ऊर्जा, जलविद्युत, रेलवे और सड़क संपर्क जैसी परियोजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है. नेपाल से भारत को बिजली निर्यात भी दोनों देशों के संबंधों का नया आधार बनकर उभरा है.
नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह उच्चस्तरीय दौरा दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. ऐसे समय में जब दक्षिण एशिया की भू-राजनीति तेजी से बदल रही है, भारत और नेपाल के बीच संवाद और सहयोग को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी अहम माना जा रहा है. विदेश मंत्री शिशिर खनाल 7 जून को अपनी यात्रा समाप्त कर काठमांडू लौटेंगे.









