विंबलडन में भारत के अर्नव पापरकर की ऐतिहासिक उपलब्धि

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लंदन: ​विंबलडन टेनिस प्रतियोगिता के जूनियर बॉयज एकल वर्ग में भारतीय टेनिस के उभरते सितारे १८ वर्षीय अर्नव पापरकर ने क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर एक नया इतिहास रच दिया है। लंदन में जारी इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम में अर्नव ने ३६ साल पुराने इतिहास को दोहराया है। इससे पहले सन १९९० में भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने विंबलडन जूनियर के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। पेस की उसी ऐतिहासिक उपलब्धि का पीछा करते हुए अर्नव इतने लंबे समय के बाद इस मुकाम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।
​प्रतियोगिता के प्री-क्वार्टर फाइनल मैच में अर्नव ने जापान के रियो तबाता पर शुरू से ही अपना पूरा दबदबा बनाए रखा। उन्होंने तबाता को ६-२, ६-१ के सीधे सेटों में आसानी से शिकस्त देकर अंतिम ८ का सफर तय किया। अर्नव ने क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने के सफर में अपने बेहतरीन खेल कौशल से सभी को बेहद प्रभावित किया है। विशेष रूप से दूसरे दौर में उन्होंने विश्व जूनियर रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज मजबूत अमेरिकी खिलाड़ी कीटन हेन्स को ६-२, ६-३ से हराकर टूर्नामेंट में बड़ा उलटफेर किया था।
​अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ (आईटीएफ) की जूनियर विश्व रैंकिंग में १९वें स्थान पर मौजूद अर्नव के करियर का यह अब तक का सबसे बड़ा और यादगार प्रदर्शन है। लगभग ६ फीट लंबे इस युवा खिलाड़ी की सबसे बड़ी ताकत उनकी पहली सर्विस को माना जाता है। हेन्स के खिलाफ मैच में उन्होंने ६ ‘एस’ लगाए थे और पूरे मैच के दौरान एक भी ब्रेक पॉइंट नहीं गंवाया।
​अर्नव की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और खास रणनीतिक तैयारी रही है। वह हेमंत बेंद्रे टेनिस एकेडमी में कोच प्रसोनजीत पाल की देखरेख में अपनी ट्रेनिंग ले रहे हैं। बड़े टूर्नामेंटों में कोर्ट पर उतरने से पहले वे विरोधी खिलाड़ियों के खेल का गहराई से अध्ययन करते हैं और उनकी कमजोरियों को भांपकर विशेष रणनीति तैयार करते हैं। इससे पहले रोलाँ गैरो (फ्रेंच ओपन) जूनियर चैंपियनशिप २०२६ के तीसरे दौर में पहुंचकर विश्व जूनियर रैंकिंग के टॉप २० में जगह बनाने वाले अर्नव ने विंबलडन के इस प्रदर्शन से साबित कर दिया है कि भारतीय टेनिस का भविष्य बेहद सुरक्षित हाथों में है।

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