कौन थीं भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक रचना श्रॉफ
वाशिंगटन/नई दिल्ली: भारतीय-अमेरिकी ऑन्कोलॉजिस्ट और एरिज़ोना विश्वविद्यालय की वरिष्ठ शोधकर्ता रचना श्रॉफ का ४७ वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी मौत उसी कैंसर से हुई, जिसके अध्ययन और इलाज के लिए उन्होंने अपना पूरा करियर समर्पित कर दिया था।
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वह टर्मिनल एडेनोकार्सिनोमा (आंतों से जुड़े कैंसर) से पीड़ित थीं। कैंसर का पता चलने के बाद भी वह लगातार शोध कार्य में जुटी रहीं और कैंसर से संबंधित एक बड़ी कॉन्फ्रेंस में भी शामिल हुई थीं।
इसी वर्ष चला था बीमारी का पता
एरिज़ोना विश्वविद्यालय के कैंसर सेंटर में क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन की एसोसिएट डायरेक्टर रचना श्रॉफ को इसी वर्ष मई में अपनी बीमारी के बारे में पता चला था। शुरुआत में इसका मूल स्रोत अज्ञात था और यह उनके शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका था।
जांच में पता चला कि इसकी शुरुआत संभवतः पेट या आंत से हुई थी। उनकी मेडिकल टीम ने शुरुआत में इसे लिम्फोमा समझा था, जो रक्त कैंसर का एक प्रकार है। बाद में पुष्टि हुई कि यह टर्मिनल एडेनोकार्सिनोमा था। यह एक ऐसा कैंसर है जो अंगों की परत बनाने वाली कोशिकाओं में पनपता है।
बीमारी पर की थी खुलकर बात
निधन से कुछ दिन पहले उन्होंने एनबीसी न्यूज़ की ऐन थॉम्पसन के साथ ज़ूम इंटरव्यू में अपनी बीमारी पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “यह एक लंबा सफर रहा है। मैंने अपनी पूरी जिंदगी कैंसर, खासकर पैंक्रियाटिक कैंसर और लिवर कैंसर को खत्म करने की कोशिश में लगा दी।”
जब उनके पति पुनीत, १७ वर्षीय बेटी सिमरन और १३ वर्षीय बेटे सचिन को पता चला कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, तो उनके लिए इस बात को स्वीकार करना बेहद कठिन था।
कौन थीं रचना श्रॉफ?
रचना श्रॉफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजिस्ट थीं। वह पैंक्रियाटिक और बिलियरी ट्रैक्ट कैंसर के इलाज में प्रमुख विशेषज्ञ मानी जाती थीं।
एरिज़ोना विश्वविद्यालय में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वह हेमेटोलॉजी एंड ऑन्कोलॉजी डिवीजन की प्रमुख, एरिज़ोना कैंसर सेंटर में क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन की एसोसिएट डायरेक्टर और मेडिसिन की प्रोफेसर थीं। इसके अलावा उन्हें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी के लिए जॉन एफ. एंड वैली एस. डुवल एंडोव्ड प्रोफेसर के रूप में भी नियुक्त किया गया था। उन्होंने टक्सन स्थित कॉलेज ऑफ मेडिसिन में क्लिनिकल एंड ट्रांसलेशनल रिसर्च के लिए एसोसिएट डीन के तौर पर भी कार्य किया।





