नई दिल्ली: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि भारतीय रेल की करीब १,०६८ हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण है, जो कुल भूमि का लगभग ०.२१ प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि रेलवे की अधिकतर भूमि पटरियों के पास स्थित है, जबकि शेष भूमि स्टेशनों, कॉलोनियों और अन्य विकास कार्यों में उपयोग होती है। अतिक्रमण को गंभीर समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता है, क्योंकि अधिकतर जगहों पर गरीब लोगों की झुग्गियां बसी हैं।
मंत्री के अनुसार, भूमि सुरक्षा के लिए डिजिटलीकरण, ड्रोन और सैटेलाइट सर्वेक्षण जैसे तकनीकी उपाय अपनाए गए हैं, जिससे नए अतिक्रमण में कमी आई है।
उन्होंने सूरत का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से अतिक्रमणकारियों को आवास योजना के तहत घर देने का आश्वासन देकर जमीन खाली कराई गई।
पिछले पांच वर्षों में लगभग ९८.०२ हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है। वहीं, खाली जमीन का उपयोग बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक विकास के लिए किया जा रहा है, जिससे इस वित्त वर्ष में करीब ९०० करोड़ रुपये राजस्व मिलने की उम्मीद है।









