मध्य पूर्व में सैन्य संतुलन बदलने के आसार
नयी दिल्ली: रूस तेजी से ईरानी वायुसेना के लिए सुखोई एसयू-३५ फाइटर जेट तैयार कर रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, रूस द्वारा ईरान को कुल ३० सुखोई एसयू-३५ लड़ाकू विमान सौंपने की योजना है, जिनमें से कुछ विमानों की डिलीवरी पहले ही की जा चुका है। युद्धकालीन औद्योगिक दबावों के बावजूद कोम्सोमोलस्क-ऑन-अमूर एविएशन प्लांट में इन विमानों का निर्माण कार्य काफी तेजी से चल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन आधुनिक विमानों की आपूर्ति से ईरान की हवाई मारक क्षमता, लंबी दूरी के हमलों और जासूसी प्रणालियों में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। ईरान की इस नई हवाई ताकत को मध्य पूर्व में अमेरिका और इजरायल के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च २०२६ तक १६ विमान तैयार हो चुके थे, और जुलाई २०२६ तक यह संख्या बढ़कर १९ से २० के बीच पहुंचने का अनुमान है। रूस का लक्ष्य २०२७ की शुरुआत तक सभी ३० विमान ईरान को सौंपने का है।
तकनीकी रूप से यह विमान ४.५ पीढ़ी का दो इंजन वाला अत्यधिक उन्नत मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो अधिकतम २४०० किमी प्रति घंटे की गति से उड़ान भर सकता है। इसमें शक्तिशाली ‘इरबिस-ई’ रडार प्रणाली लगी है, जो ४०० किलोमीटर की दूरी तक के लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है। साथ ही, यह विमान एक बार ईंधन भरने पर ३६०० किमी की दूरी तय कर सकता है तथा हवा से हवा में मार करने वाली, एंटी-शिप और एंटी-रेडिएशन मिसाइलें ले जाने में पूरी तरह सक्षम है।










