कोलकाता: अस्पताल के अत्यंत क्रिटिकल केयर यूनिट (आईसीयू) में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही एक छात्रा, महज एक सप्ताह के भीतर पूरी तरह स्वस्थ होकर परीक्षा हॉल में पेपर देने पहुंच जाए, यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। लेकिन कोलकाता की सृष्टि दुबे के जीवन में यह हकीकत बनकर सामने आया है। गंभीर स्वास्थ्य संकट को मात देकर एक हफ्ते के भीतर परीक्षा की बेंच पर बैठी सृष्टि की यह यात्रा आज मानवीय जीवटता, अटूट हौसले और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली की एक बेमिसाल कहानी बन चुकी है।
कोलकाता के दमदम स्थित ‘आईएलएस अस्पताल’ में अत्यंत नाजुक हालत में भर्ती कराई गई सृष्टि ने न केवल अपनी बीमारी को परास्त किया, बल्कि अपने शैक्षणिक भविष्य को भी दांव पर नहीं लगने दिया। डॉक्टरों की विशेषज्ञता, दिन-रात की मेहनत और सृष्टि के ‘कभी न हार मानने’ के जज्बे के कारण ही अस्पताल के बेड से उठकर सीधे परीक्षा में शामिल होना संभव हो सका।
अपनी बेटी के इस अभूतपूर्व संघर्ष और पुनर्जन्म पर भावुक होते हुए पिता श्री श्रीराम शिवजी दुबे ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की टीम के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। श्री दुबे ने रूंधे गले से कहा, “आईएलएस अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने मेरी बेटी को एक नया जीवन दिया है। इतनी गंभीर परिस्थितियों से गुजरने के बाद भी उसने अपने सपनों और पढ़ाई से मुंह नहीं मोड़ा। हमें वहां जो इलाज, देखभाल और संबल मिला है, उसके लिए हमारा परिवार हमेशा अस्पताल का ऋणी रहेगा।”
चिकित्सकों के अनुसार, जब सृष्टि को अस्पताल लाया गया था, तब उनकी स्थिति बेहद चिंताजनक और चुनौतीपूर्ण थी। लेकिन समय पर की गई सही जांच और क्रिटिकल केयर टीम के त्वरित व सटीक इलाज की बदौलत ही उसे इतनी जल्दी रिकवर करना संभव हो पाया।
सृष्टि का यह सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि सही समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा मिले और व्यक्ति के भीतर कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो हर असंभव दिखने वाली चुनौती को भी घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है।









