संस्थागत प्रसव दर को ९०% से पार ले जाने का लक्ष्य
शिलांग: मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री वाइलाडमिकी श्याल्ला के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्यभर में स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण को और अधिक मजबूत बनाना तथा मरीजों के उपचार के परिणामों में सुधार लाना था।
समीक्षा बैठक के दौरान ‘मेघालय स्वास्थ्य बीमा योजना’ (एमएचआईएस) के तहत प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-६(एनएफएचएस-६) में दर्ज किए गए सकारात्मक सुधारों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री संगमा ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना’ (सीएम-एसएमएस) के तहत परिवहन सहायता जैसी पहलों के कारण संस्थागत प्रसव (अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी आई है। उन्होंने कहा कि हालांकि संस्थागत प्रसव की स्थिति पहले से काफी बेहतर हुई है, लेकिन अब सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर ९० प्रतिशत से अधिक करना है।
गर्भवती महिलाओं और नवजातों की बेहतर देखभाल के लिए बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण रणनीतियों पर चर्चा की गई:
प्रथम तिमाही पंजीकरण: गर्भवती महिलाओं का गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के भीतर अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करना।
आयरन और फोलिक एसिड की उपलब्धता: गर्भवती महिलाओं को समय पर आयरन और फोलिक एसिड की खुराक की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं का सुदृढ़ीकरण: एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रसव-पूर्व (एंटीनेटल) और प्रसव-पश्चात (पोस्टनेटल) देखभाल को और मजबूत बनाना।
सामुदायिक देखभाल पहल का विस्तार: ग्राम संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से ‘कम्युनिटी केयरगिवर इनिशिएटिव’ (सामुदायिक देखभालकर्ता पहल) का दायरा बढ़ाना।
इसके अतिरिक्त, बैठक में शिशु पोषण में सुधार के लिए जन्म के पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान को बढ़ावा देने, पर्याप्त पोषण सुनिश्चित करने और दो बच्चों के बीच उचित अंतर रखने के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही, निवारक स्वास्थ्य पहलों और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियों (नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज) के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी निर्णय लिया गया।










