नई दिल्ली: भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने एशियाई खेलों में इतिहास रचा। उन्होंने महिलाओं के ४९ किग्रा भार वर्ग स्पर्धा में कुल १९८ किग्रा वजन उठाकर रजत पदक जीता। यह एशियाई खेलों में मीराबाई का पहला पदक है। इसके साथ ही भारत ने भारोत्तोलन में २८ साल बाद एशियाई खेलों का पदक हासिल किया। मीराबाई ने स्नैच में ८३ किग्रा के साथ शुरुआत की और दूसरे प्रयास में ८५ किग्रा वजन उठाया। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में ८७ किग्रा वजन उठाया। स्नैच के बाद वे पदक की दौड़ में मजबूती के साथ बनी हुई थीं। क्लीन एंड जर्क में मीराबाई ने १०७ किग्रा के सफल प्रयास के साथ शुरुआत की। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में १११ किग्रा वजन उठाया। तीसरे प्रयास की आवश्यकता नहीं पड़ी और उनका कुल स्कोर १९८ किग्रा रहा। इस तरह मीराबाई ने स्नैच में ८७ किग्रा और क्लीन एंड जर्क में १११ किग्रा के साथ कुल १९८ किग्रा वजन उठाकर रजत पदक जीता। उत्तर कोरिया की रि सोंग गुम ने कुल २१५ किग्रा वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने स्नैच में ९४ किग्रा और क्लीन एंड जर्क में १२१ किग्रा वजन उठाया। इंडोनेशिया की विजायाना लुलुक दियाना त्रि ने १९१ किग्रा वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। उन्होंने स्नैच में ८८ किग्रा और क्लीन एंड जर्क में १०३ किग्रा वजन उठाया। मीराबाई के रजत जीतने के साथ ही भारत का एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में लंबे समय से जारी पदक का इंतजार भी समाप्त हो गया। भारत के लिए इससे पहले १९९८ बैंकॉक एशियाई खेलों में कर्णम मल्लेश्वरी ने रजत पदक जीता था। उसके बाद भारत इस खेल में कोई पदक नहीं जीत सका था, लेकिन बुधवार को मीराबाई ने रजत पदक जीतकर २८ साल से जारी सूखे को समाप्त किया। मीराबाई चानू का यह तीसरा एशियाई खेल है। इससे पहले उन्होंने २०१४ और २०१८ के संस्करणों में भी हिस्सा लिया था लेकिन पदक नहीं जीत सकी थीं। चोट के कारण वे २०२२ एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले सकी थीं। ओलंपिक, विश्व चैम्पियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीत चुकीं मीराबाई के लिए एशियाई खेलों का पदक अब तक एक अधूरा सपना था, जिसे उन्होंने आज पूरा किया। जापान के आइची-नागोया में जारी एशियाई खेलों में सफलता हासिल करने के बाद खुश दिख रहीं मीराबाई ने कहा, “अंत में जाकर मैंने पदक जीत लिया। रजत पदक जीतकर मैं बहुत खुश हूँ। मैंने कई सालों तक इसके लिए इंतजार किया। जब मैंने भारोत्तोलन खेल शुरू किया था तब से ही यह मेरा सपना था, जो अंत में जाकर पूरा हुआ। मुझे खुद पर गर्व है। मैंने लंबे समय बाद देश के लिए भारोत्तोलन में रजत पदक जीता।” ऐतिहासिक पदक जीतने के बाद मीराबाई ने सरकार से अर्जुन पुरस्कार देने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं सरकार से अर्जुन पुरस्कार देने का अनुरोध करना चाहती हूँ। मुझे बहुत खुशी होगी। अर्जुन पुरस्कार सबसे बड़ा पुरस्कार है और वह मेरे पास नहीं है। मैं इस पुरस्कार को हासिल करना चाहती हूँ।”





