पेरिस: फ्रेंच ओपन २०२६ टेनिस टूर्नामेंट के महिला एकल वर्ग में सेमीफाइनल की तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। पोलैंड की माजा च्वालिन्स्का और रूस की डायना श्नाइडर ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मैच जीतकर पहली बार ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। इसमें श्नाइडर ने दुनिया की नंबर १ खिलाड़ी आर्यना सबालेंका को हराकर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर किया।
पोलैंड की २४ वर्षीय माजा च्वालिन्स्का ने महिला एकल के क्वार्टर फाइनल में २२वीं वरीयता प्राप्त एन्ना कालिन्स्काया को ७-६ (३), ६-३ से हराकर अपने करियर के पहले ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल में जगह बनाई। मुकाबले के दौरान दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबी रैलियां और कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन निर्णायक मौकों पर च्वालिन्स्का ने बेहतर खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने मिले ८ ब्रेक पॉइंट्स में से ७ को भुनाया, जबकि कालिन्स्काया ११ में से केवल ५ का ही फायदा उठा सकीं।
च्वालिन्स्का ने शुरुआती गेम गंवाने के बाद लगातार अंक बटोरते हुए ५-१ की बढ़त बना ली थी। हालांकि, कालिन्स्काया ने भी असाधारण वापसी करते हुए लगातार ४ गेम जीते और स्कोर ५-५ की बराबरी पर ला खड़ा किया। इसके बाद पहला सेट टाई-ब्रेकर तक पहुंचा, जहां च्वालिन्स्का ने ७-३ से जीत दर्ज कर मैच में बढ़त बनाई। दूसरे सेट में च्वालिन्स्का ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को शुरुआत से ही दबाव में रखा और ६-३ से दूसरा सेट जीतकर मैच अपने नाम कर लिया।
रोलां गैरो पर यह च्वालिन्स्का की लगातार आठवीं जीत है। इसके साथ ही वह ओपन एरा में फ्रेंच ओपन के महिला एकल सेमीफाइनल में पहुंचने वाली केवल दूसरी क्वालीफायर खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले २०२० में नादिया पोडोरोस्का ने यह उपलब्धि हासिल की थी। अब च्वालिन्स्का के पास ओपन एरा में फ्रेंच ओपन के महिला एकल फाइनल में पहुंचने वाली पहली क्वालीफायर खिलाड़ी बनने का सुनहरा मौका है।
दूसरे क्वार्टर फाइनल में रूस की २५वीं वरीयता प्राप्त डायना श्नाइडर ने विश्व की नंबर एक खिलाड़ी आर्यना सबालेंका को ३-६, ७-५, ६-० से पराजित कर एक बहुत बड़ा उलटफेर किया। २२ वर्षीय श्नाइडर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में खेल रही थीं, लेकिन उन्होंने दबाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए करियर की सबसे बड़ी जीत हासिल की।
सबालेंका ने पहला सेट ६-३ से जीतने के बाद दूसरे सेट में भी ४-१ की बढ़त बना ली थी। एक समय तो वह मैच जीतने से महज २ अंक दूर थीं, लेकिन वहीं से श्नाइडर ने मैच का पासा पलट दिया। रूसी खिलाड़ी ने लगातार आक्रामक खेल दिखाते हुए दूसरे सेट में शानदार वापसी की और उसे ७-५ से जीतकर मैच को निर्णायक सेट में ले गईं। तीसरे सेट में श्नाइडर ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए सबालेंका को संभलने का कोई मौका नहीं दिया और ६-० से एकतरफा अंदाज में निर्णायक सेट जीतकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
मैच के दौरान सबालेंका ने कुल ५७ अनफर्स्ड एरर (स्वतः होने वाली गलतियां) किए, जिनमें से १७ तो अकेले तीसरे सेट में हुए। यह पहली बार है जब सबालेंका ने किसी मैच में ६-० से कोई सेट गंवाया है। इसके विपरीत, श्नाइडर ने ३-६, १-४ से पिछड़ने के बाद अगले १३ गेम्स में से १२ जीतकर अद्भुत वापसी का उदाहरण पेश किया। शीर्ष १० में शामिल खिलाड़ियों के खिलाफ १६ मैचों में श्नाइडर की यह केवल दूसरी जीत है। इससे पहले उन्होंने २०२४ में टोरंटो टूर्नामेंट में कोको गॉफ को हराया था। इसके साथ ही उन्होंने लगातार ६ ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल में पहुंचने के सबालेंका के अभियान पर भी रोक लगा दी।
सबालेंका की हार के साथ ही महिला एकल सेमीफाइनल का एक मुकाबला तय हो गया है, जहां अब माजा च्वालिन्स्का और डायना श्नाइडर के बीच भिड़ंत होगी। इन दोनों ही खिलाड़ियों के पास अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का सुनहरा अवसर है।










