नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को वैश्विक निवेशकों से भारत के बिजली क्षेत्र में निवेश करने का आह्वान किया और देश को निर्माण, निवेश, नवाचार एवं विस्तार का प्रमुख केंद्र बनाने की अपील की।
‘भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट २०२६’ में केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल द्वारा पढ़े गए लिखित संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी ऊर्जा यात्रा के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य न केवल ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना है, बल्कि स्वच्छ, विश्वसनीय और सतत ऊर्जा व्यवस्था स्थापित करना भी है। उन्होंने कहा कि भारत में पहले ही गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता का ५० प्रतिशत से अधिक हिस्सा हासिल किया जा चुका है और वर्ष २०३० तक ५०० गीगावाट का लक्ष्य रखा गया है।
मोदी ने ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए वैश्विक ऊर्जा सहयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत हरित ऊर्जा, बैटरी विनिर्माण, हरित रोजगार और ऊर्जा अवसंरचना के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ और वितरण सुधारों ने ऊर्जा क्षेत्र को अधिक दक्ष और टिकाऊ बनाने में मदद की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत २०४७ तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से अग्रसर है और ऊर्जा क्षेत्र इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बनेगा।









