ग्लासगो: राष्ट्रमंडल खेल २०२६ के बॉक्सिंग रिंग में भारत का प्रदर्शन यादगार रहा। भारतीय मुक्केबाजों ने इन खेलों में अपना वर्चस्व कायम रखते हुए कुल १० पदक जीते, जिसमें सात स्वर्ण पदक शामिल हैं।
महिला वर्ग में प्रीति पवार (५४ किग्रा) और जैस्मिन लम्बोरिया (५७ किग्रा) के बाद साक्षी चौधरी (५१ किग्रा), अरुंधति चौधरी (७० किग्रा) और प्रिया घंघास (६० किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीते। वहीं पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच (६० किग्रा) और अंकुश (८० किग्रा) ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इसके अलावा लवलीना बोरगोहेन, जादुमणि सिंह और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर बॉक्सिंग में भारत के पदकों की संख्या १० पहुंचा दी।
महिलाओं के ५१ किग्रा वर्ग के फाइनल में साक्षी ने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को सर्वसम्मति (५-०) से पराजित किया। साक्षी ने तीनों राउंड में शानदार प्रदर्शन किया। इसी तरह प्रिया धनखड़ (घंघास) ने महिलाओं के ६० किग्रा वर्ग के फाइनल में कनाडा की मैरी बाथेल अल अहमदी के खिलाफ स्प्लिट फैसले (४-१) से जीत दर्ज की। पहले राउंड में पिछड़ने के बावजूद प्रिया ने असाधारण वापसी करते हुए स्वर्ण पदक जीता।
प्रिया के बाद अरुंधति चौधरी ने महिलाओं के ७० किग्रा वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड की चेटेले रीड को आसानी से ५-० से हराया। हालांकि, ओलंपिक पदक विजेता लवलीना को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। फाइनल में लवलीना का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की एम्मा सुई ग्रीनट्री से हुआ, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज ने स्प्लिट फैसले (४-१) से जीत हासिल की।
महिलाओं के बाद पुरुष बॉक्सिंग में भी भारत का जलवा रहा। सचिन सिवाच ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने पुरुषों के ६० किग्रा वर्ग के फाइनल में नामीबिया के मॉर्निंग नदेवेलो को स्प्लिट फैसले (३-२) से हराया। शुरुआत में पिछड़ने के बावजूद सचिन ने अंतिम १० सेकंड में घूंसों की बरसात करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया।
सचिन के बाद अंकुश ने भी गोल्डन पंच लगाया। पुरुषों के ८० किग्रा वर्ग के फाइनल में अंकुश ने इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को स्प्लिट फैसले (४-१) से पराजित किया। हालांकि, भारतीय मुक्केबाज नरेंद्र को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। नरेंद्र को पुरुषों के ९०+ किग्रा वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड के डमार थॉमस ने सर्वसम्मत फैसले (५-०) से हराया।










