भाद्र की पवित्रता में शिक्षा और आध्यात्मिकता का संगम

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टीयोक में आऊनीआटी विश्वविद्यालय का नया अध्याय

टीयोक: पवित्र भाद्र महीने के धार्मिक–आध्यात्मिक वातावरण के बीच असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व सरमा ने टीयोक के कलियापानी स्थित श्रीश्री आऊनीआटी सत्र तथा ऐतिहासिक ढेकियाखोवा बरनामघर पहुंचकर सेवा अर्पित की और भक्त–वैष्णवों का आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री शर्मा ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस अवसर को अपने लिए अत्यंत कृतार्थ करने वाला बताया।
धार्मिक आस्था के साथ मुख्यमंत्री शर्मा के दौरे का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू आऊनीआटी विश्वविद्यालय के नवनिर्मित शैक्षणिक भवन का उद्घाटन रहा। आऊनीआटी सत्र की पहल पर विकसित इस विश्वविद्यालय को उन्होंने टीयोक–कलियापानी क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा बताया।
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, इसी क्षेत्र में असम महिला विश्वविद्यालय और जोरहाट सरकारी विधि महाविद्यालय के नए परिसर भी विकसित हो रहे हैं। ऐसे में आऊनीआटी विश्वविद्यालय के विस्तार से इस क्षेत्र का शैक्षणिक महत्व और बढ़ गया है। इससे टीयोक–कलियापानी केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के उभरते केंद्र के रूप में भी स्थापित होने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से आध्यात्मिक शिक्षा तक
आऊनीआटी विश्वविद्यालय की अवधारणा की विशेषता आधुनिक तकनीक और भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों के बीच समन्वय में दिखाई देती है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा है कि विश्वविद्यालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और डेटा साइंस जैसी नई तकनीकी विधाओं के साथ भारतीय आध्यात्मिकता, नैतिकता और मूल्य–परंपराओं को शिक्षा का आधार बनाएगा।
विश्वविद्यालय के आधिकारिक विवरण में भी इसकी शैक्षणिक दृष्टि को असम की वैष्णव परंपरा से जोड़ा गया है। विनम्रता, अहिंसा, आत्मअनुशासन, सत्यनिष्ठा और सेवाभाव जैसे मूल्यों को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष २०२२ में हुई थी और वर्तमान में स्नातक से लेकर स्नातकोत्तर तथा शोध स्तर तक विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
विकास की नई भाषा या सांस्कृतिक पुनर्स्थापना?
मुख्यमंत्री के वक्तव्य को केवल एक शैक्षणिक भवन के उद्घाटन संबंधी औपचारिक संदेश के रूप में देखने के बजाय, असम में शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान को एक ही विकास–दृष्टिकोण से जोड़ने के प्रयास के रूप में समझा जा सकता है।
विशेष रूप से असम की वैष्णव सत्र परंपरा राज्य की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार रही है। इसी परंपरा से जुड़े संस्थान के अंतर्गत आधुनिक तकनीक केंद्रित विश्वविद्यालय का विस्तार अपने आप में प्रतीकात्मक महत्व रखता है। एक ओर एआई और रोबोटिक्स जैसी भविष्य की तकनीकें हैं, तो दूसरी ओर शंकरदेव–माधवदेव की भक्ति, नैतिकता और सामाजिक समरसता की परंपरा। इन दोनों को एक ही शैक्षणिक ढांचे में जोड़ने का प्रयास असम की शिक्षा व्यवस्था में एक अलग प्रयोग का संकेत देता है।
हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता केवल भवन निर्माण या पाठ्यक्रमों की घोषणा पर निर्भर नहीं करेगी। विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों, शोध, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, उद्योग जगत के साथ सहयोग, रोजगारपरक शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा को सुनिश्चित कर पाएगा, तभी ‘आध्यात्मिकता और आधुनिक तकनीक का संगम’ व्यवहार में सफल साबित होगा।
टीयोक के लिए अवसर
आऊनीआटी विश्वविद्यालय के विस्तार का स्थानीय स्तर पर भी दीर्घकालीन प्रभाव पड़ने की संभावना है। विश्वविद्यालय, महिला विश्वविद्यालय और विधि महाविद्यालय जैसे संस्थानों के एक ही क्षेत्र में मजबूत होने से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों तथा शैक्षणिक सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है।
इससे टीयोक–कलियापानी को धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक अध्ययन और उच्च शिक्षा के त्रिकोणीय केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी खुलती हैं। इसके लिए स्थानीय आधारभूत संरचना, परिवहन, डिजिटल कनेक्टिविटी, छात्रावास और शोध–केंद्रित वातावरण में समानांतर निवेश आवश्यक होगा।
मुख्यमंत्री सरमा के संदेश का मूल भाव यही दिखाई देता है कि असम की परंपरा को संग्रहालयों तक सीमित रखने के बजाय उसे आधुनिक ज्ञान और तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी के लिए उपयोगी बनाया जाए।
भाद्र की पवित्रता के अवसर पर सत्र और बरनामघर में सेवा अर्पित करने के साथ विश्वविद्यालय के नए शैक्षणिक भवन का उद्घाटन इसलिए धार्मिक आस्था और आधुनिक विकास के बीच एक प्रतीकात्मक सेतु के रूप में सामने आता है। अब चुनौती इस सेतु को दीर्घकालीन, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख शैक्षणिक यात्रा में परिवर्तित करने की है।

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