“बंगाल मेरा दूसरा घर है”: इस्तीफे के बाद पूर्व राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस का भावपूर्ण विदाई संदेश

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काेलकाता: कोलकाता से विदा लेते समय पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने एक खुले पत्र में राज्य की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि उनका बंगाल से रिश्ता खत्म नहीं हुआ है।
बोस ने अपने इस्तीफे के कारणों पर खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन यह जरूर बताया कि पश्चिम बंगाल उनके लिए “दूसरा घर” बन चुका है। उन्होंने लिखा कि राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन बंगाल के साथ उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है।
अपने पत्र में उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे लोक भवन, कोलकाता में मेरी पारी समाप्त हो रही है, मैं एक बार फिर मुझे दिए गए समर्थन और विचार के लिए आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। मैं इस प्यारे राज्य में बिताए गए क्षणों को हमेशा संजोकर रखूंगा।”
बोस ने बंगाल में लोगों से मिले स्नेह को भी याद किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें “बहन का स्नेह, एक छोटे लड़के का पीठ थपथपाना, एक युवा का दृढ़ हाथ मिलाना और दूर से उठे हाथों के संदेश” आज भी याद हैं।
उन्होंने महात्मा गांधी के एक पुराने कथन का जिक्र करते हुए लिखा, “कई दशक पहले गांधीजी ने कहा था, ‘मैं बंगाल नहीं छोड़ सकता और बंगाल मुझे जाने नहीं देगा।’ आज मैं भी वही महसूस कर रहा हूं।”
बोस ने रवीन्द्रनाथ टैगोर की एक कविता का उद्धरण देते हुए कहा कि ईश्वर वहां है जहां किसान खेत जोत रहा है और जहां मजदूर पत्थर तोड़ रहा है।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग महान ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे और वह भी अपने विनम्र तरीके से इसमें योगदान देते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पद छोड़ने के बाद भी वह पश्चिम बंगाल में वोट देने आएंगे क्योंकि उन्होंने अपना मतदाता पहचान पत्र यहीं स्थानांतरित कराया है।

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