बंगाल चुनाव को लेकर सियासत तेज: बीजेपी ने ईसी से कम चरणों में मतदान की मांग

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म होता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई ने चुनाव आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। पार्टी ने विशेष रूप से चुनाव के दौरान होने वाली हिंसा और राज्य प्रशासन की भूमिका पर चिंता व्यक्त की है। केन्द्रीय बलों की ज्यादा तैनाती की भी मांग की है।
बीजेपी ने आयोग से मांग की है कि पश्चिम बंगाल में लंबी चुनाव प्रक्रिया के बजाय मतदान एक या अधिकतम दो चरणों में कराया जाए। पार्टी का कहना है कि छह सप्ताह तक चलने वाले ७–८ चरणों के चुनाव से हिंसा और प्रशासनिक हस्तक्षेप की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा बीजेपी ने २०१९ और २०२४ के लोकसभा चुनाव तथा २०२१ के विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के निर्देश पर ट्रांसफर किए गए अधिकारियों को दोबारा स्थानांतरित करने की भी मांग की है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बीजेपी ने राज्य पुलिस पर निर्भरता कम करने की बात कही है। पार्टी ने संवेदनशील बूथों की पहचान कर वहां केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ( सिएपिएफ) की अग्रिम तैनाती की मांग की। साथ ही यह सुझाव दिया कि केंद्रीय बलों को क्षेत्र की जानकारी देने के लिए विशेष हैंडबुक उपलब्ध कराई जाए और उनके मूवमेंट तथा तैनाती में पूरी पारदर्शिता रखी जाए। पार्टी ने यह भी कहा कि जवान स्थानीय लोगों से किसी प्रकार की मेहमाननवाजी स्वीकार न करें।
बीजेपी ने मतदाताओं की पहचान के लिए दो चरणों की व्यवस्था, हर पोलिंग स्टेशन पर वेबकैम की निगरानी और चुनाव ड्यूटी में राज्य तथा केंद्र सरकार के अधिकारियों की ५०-५० प्रतिशत भागीदारी का भी प्रस्ताव रखा है। पार्टी का मानना है कि इन उपायों से चुनाव प्रक्रिया और अधिक निष्पक्ष बन सकेगी।
उधर, सीपीआई(एम) और कांग्रेस की राज्य इकाइयों ने भी चुनाव आयोग से मुलाकात कर कम चरणों में चुनाव कराने की मांग दोहराई। हालांकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस इस प्रस्ताव के समर्थन में नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि चुनाव के चरणों पर चर्चा आयोग की बैठक का मुख्य विषय नहीं था।
फिलहाल चुनाव आयोग ने सभी दलों से सुझाव लेने के बाद स्थिति पर विचार करने की बात कही है।

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