मियामी: फीफा विश्व कप २०२६ के तीसरे स्थान के प्ले-ऑफ में इंग्लैंड के खिलाफ ४-६ से हार के साथ फ्रांस के सबसे सफल कोचों में से एक दिदिएर देशॉ का १४ साल का लंबा कार्यकाल समाप्त हो गया। साल २०१२ में फ्रांस का मुख्य कोच नियुक्त होने वाले देशॉ ने टीम को २०१८ में विश्व कप चैंपियन बनाया और २०२२ में फाइनल तक पहुँचाया। उनके मार्गदर्शन में फ्रांस ने कई बड़े टूर्नामेंटों में अपनी छाप छोड़ी। फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अब फ्रांस के महान खिलाड़ी जिनेदिन जिदान १ सितंबर से राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच का पद संभालेंगे। शनिवार रात मियामी स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ हार के साथ फ्रांसीसी टीम के साथ देशॉ के यादगार सफर का अंत हो गया।
दिदिएर देशॉ के नेतृत्व में फ्रांस ने फुटबॉल जगत में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस हासिल की। उनके प्रशिक्षण में फ्रांस ने २०१८ फीफा विश्व कप के साथ-साथ २०२१ में यूईएफए नेशंस लीग का खिताब जीता, जबकि २०२२ विश्व कप में टीम उपविजेता रही थी। फ्रेंच फुटबॉल महासंघ ने देशॉ के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि महासंघ २०१२ से राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में दिदिएर देशॉ द्वारा किए गए असाधारण कार्यों को सलाम करता है और उनके प्रति आभार व्यक्त करता है। फ्रांसीसी फुटबॉल की सेवा में उनके लगभग २५ साल के असाधारण योगदान का अध्याय पूरा हुआ। कुछ करियर ऐसे होते हैं, जो किसी संस्था और पूरे देश के इतिहास पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। दिदिएर देशॉ अनुशासन, सामूहिक भावना और नीली जर्सी के प्रति समर्पण के प्रतीक रहे और उनके नेतृत्व में फ्रांस की राष्ट्रीय टीम ने अपनी विश्वसनीयता, सम्मान और प्रशंसकों का विश्वास फिर से हासिल किया।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी देशॉ को भावुक विदाई देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि फ्रांसीसी फुटबॉल इतिहास का एक अध्याय समाप्त हो गया। उन्होंने दिदिएर देशॉ को ऐतिहासिक जीतों, अविस्मरणीय भावनाओं और सालों तक हमारी ‘ले ब्लू’ (Les Bleus) टीम का नेतृत्व करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने आगे कहा कि आपने पूरे फ्रांस को गर्व और रोमांच का अनुभव कराया तथा इन १४ सालों को हमेशा ‘देशॉ पीढ़ी’ के नाम से याद किया जाएगा।
इसी तरह फ्रांसीसी कप्तान किलियन एम्बापे ने भी अपने कोच के लिए एक भावुक संदेश पोस्ट करते हुए लिखा कि यह आपका आखिरी मैच था। आपने हमें इतना कुछ दिया, लेकिन हम आपको इससे बेहतर विदाई नहीं दे सके। पिछले १४ सालों में टीम के लिए आपके योगदान को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। आपने इस टीम के पुनर्निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। लोगों ने कई बार आपकी महानता को नहीं समझा, लेकिन समय और इतिहास निश्चित रूप से न्याय करेगा। उन्होंने फ्रांस की जर्सी पहनकर देशॉ के नेतृत्व में खेलने का मौका देने के लिए आभार जताया और जीवन के अगले अध्याय के लिए शुभकामनाएं दीं।
उल्लेखनीय है कि देशॉ की विदाई के बाद अब जिनेदिन जिदान पर नजरें रहेंगी। खिलाड़ी के रूप में १९९८ में विश्व कप और २००० में यूरो कप जीतने वाले जिदान कोच के रूप में क्लब फुटबॉल में पहले ही असाधारण काम कर चुके हैं।









