कोलकाता: फोर्टिस हॉस्पिटल, आनंदपुर में डॉक्टरों की टीम ने ७ वर्षीय एक बच्चे में पाए गए अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा मस्तिष्क रोग ‘एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एन्सेफैलोपैथी ऑफ चाइल्डहुड (एएनईसी)’ का सफलतापूर्वक इलाज किया है। यह बीमारी मस्तिष्क में गंभीर सूजन से जुड़ी होती है और समय पर उपचार न मिलने पर घातक साबित हो सकती है। वैश्विक स्तर पर इसके केवल कुछ सौ मामले ही दर्ज किए गए हैं।
डॉ. रितिका घोष दास्तिदार, कंसल्टेंट पीडियाट्रिशियन और पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने उन्नत जीवन रक्षक प्रणालियों और बहु-विषयक देखभाल के माध्यम से बच्चे का उपचार किया, जिससे उसकी धीरे-धीरे रिकवरी संभव हो सकी।
अस्पताल में भर्ती के समय बच्चा दौरे और असामान्य शारीरिक स्थिति से पीड़ित था। प्रारंभिक जांच में मस्तिष्क में रक्त के थक्के, लिवर की कार्यक्षमता में गड़बड़ी और शरीर में अत्यधिक सूजन के संकेत मिले। ब्रेन स्कैन से एएनईसी की पुष्टि हुई, जो तेजी से बढ़ने वाली गंभीर स्थिति है।
बीमारी के बढ़ने पर बच्चे की किडनी ने काम करना बंद कर दिया, जिसके कारण विषैले तत्वों को हटाने और सूजन नियंत्रित करने के लिए उन्नत डायलिसिस की जरूरत पड़ी। उपचार के दौरान गंभीर संक्रमण भी हुआ, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो गई और रक्तचाप तथा हृदय की स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए गहन चिकित्सा देखभाल आवश्यक हो गई।
दो सप्ताह तक मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रखने के बाद, लंबे समय तक श्वसन सहायता के लिए ट्रेकियोस्टॉमी की गई। उपचार के दौरान हृदय गति और रक्तचाप में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रही, जिसके चलते निरंतर निगरानी जरूरी रही।
लगभग दो महीने तक गहन देखभाल में रहने के बाद बच्चे की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। डिस्चार्ज के समय दोबारा किए गए ब्रेन इमेजिंग में सुधार के संकेत मिले। बच्चा ट्रेकियोस्टॉमी के माध्यम से स्वयं सांस लेने में सक्षम था और फीडिंग ट्यूब के जरिए पोषण ले रहा था। उसके न्यूरोलॉजिकल सुधार में भी क्रमिक प्रगति देखी गई।
डॉ. रितिका घोष दास्तिदार ने कहा कि एएनईसी बच्चों में अत्यंत दुर्लभ और आक्रामक मस्तिष्क रोग है, जो बहुत तेजी से जानलेवा बन सकता है। ऐसे मामलों में उन्नत चिकित्सा, निरंतर निगरानी और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक होता है।
फोर्टिस हॉस्पिटल, आनंदपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर आशीष मुखर्जी ने कहा कि यह मामला अस्पताल की पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर क्षमता और जटिल स्थितियों से निपटने की दक्षता को दर्शाता है।










