वरिष्ठ नेताओं पर कार्रवाई को लेकर पार्टी में असमंजस
काेलकाता: तृणमूल कांग्रेस(टीएमसी)के भीतर जारी बड़े घमासान के बीच पार्टी के आठ वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित किए जाने की खबर ने मंगलवार को एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप राय, जावेद खान, रथीन घोष, बिप्लब मित्र, सबीना यासमीन और स्नेहाशीष चक्रवर्ती को ममता बनर्जी जी के नेतृत्व वाले ‘कालीघाट तृणमूल’ से बाहर कर दिया गया है। बताया गया कि सोमवार को न्यू टाउन के एक होटल में ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व वाले बागी खेमे के साथ बैठक के बाद तृणमूल की अनुशासन समिति ने इन नेताओं को शो-कॉज किया था। हालांकि, इस शो-कॉज का जवाब मिलने से पहले ही इनके निष्कासन की खबर चारों तरफ फैल गई। दूसरी ओर, पार्टी की अनुशासन समिति ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे इस पूरे घटनाक्रम पर एक धुंधलापन बना हुआ है।
इसी बीच, फिरहाद हकीम समेत कई बड़े नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के ‘असल तृणमूल’ खेमे में शामिल हो चुके हैं। इस बागी खेमे की नई कमेटी में अरूप राय को चेयरमैन तथा फिरहाद हकीम और अरूप विश्वास को सह-अध्यक्ष बनाया गया है। इस संबंध में मंगलवार की शाम ऋतब्रत गुट का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल सीईओ ऑफिस पहुंचा और उन्हें अपना आधिकारिक पत्र सौंपा। वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी जी ने भी अपनी ओर से नई ‘नेशनल वर्किंग कमेटी’ की सूची चुनाव आयोग को भेज दी है, जिसमें अरूप विश्वास जैसे कई पुराने और दिग्गज चेहरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। अब चुनाव आयोग के सामने तृणमूल की दो अलग-अलग कमेटियों का दावा पहुंच चुका है। ऐसे में किसे ‘असली’ तृणमूल माना जाएगा, यह एक बड़ा गंभीर सवाल बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों खेमों की यह अंदरूनी लड़ाई अब चुनाव आयोग से आगे बढ़कर अदालत के दरवाजे तक भी पहुंच सकती है।










